कबीर संजय का जन्म 10 जुलाई, 1977 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। साहित्य के अलावा सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं। पर्यावरण और वन्यजीवन से जुड़े सवाल उनकी रचनात्मकता के केन्द्र में हैं। उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘सुरखाब के पंख’, ‘फेंगशुई’ (कहानी-संग्रह); ‘चीता : भारतीय जंगलों का गुम शहजादा’, ‘ओरांग उटान : अनाथ, बेघर और सेक्स ग़ुलाम’, ‘गोडावण : मोरे अंगना की सोन चिरैया’ (वन्य जीवन); ‘जंगलमन की डायरी’ (पर्यावरण)। ‘तद्भव’, ‘पल प्रतिपल’, ‘नया ज्ञानोदय’, ‘वनमाली कथा’, ‘लमही’, ‘कादम्बिनी’, ‘इतिहासबोध’, ‘गंगा-जमुना’ और ‘हिन्दुस्तान’ सहित हिन्दी की प्रायः सभी महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘जंगलकथा’ पर्यावरण और वन्यजीवन पर केन्द्रित उनका लोकप्रिय फेसबुक पेज है। उनकी कहानी ‘पत्थर के फूल’ लखनऊ में मंचित हो चुकी है। ‘सुरखाब के पंख’ कहानी-संग्रह के लिए उन्हें प्रथम ‘रवीन्द्र कालिया स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया है।