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Dekhna

Edition: 2017, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Dekhna

उन दिनों मैं John Berger की किताब ‘Ways of Seeing’ पढ़ रहा था और इस पढ़ने के दौरान ही मुझे यह विचार आया कि लेखकों, कवियों का देखना बहुत अलग है, साथ ही इस बात पर भी ध्यान गया कि शब्द और चित्र का नाता भी गहरा है तो क्यों न इसे दर्ज किया जाए। जब भी हम कोई शब्द पढ़ते हैं तो उसका एक चित्र मन में उभरता है और जब भी हम कोई चित्र देख रहे होते हैं तब उसे मन के किसी गहरे कोने में शब्द से समझ रहे होते हैं। एक चित्र शब्द तक ले जाता है और एक शब्द चित्र में उभरता है। हर व्यक्ति का देखना विशिष्ट है, किन्तु हर व्यक्ति उसे अभिव्यक्त नहीं कर पाता। अपने इस देखने के प्रति वो इसीलिए इतना जागरूक भी नहीं होता। लेखक चूँकि अपने माध्यम का खिलाड़ी होता है और उसमें यह क्षमता दूसरों से अधिक होती है कि वो अपने देखे को व्यक्त कर सके।

यह देखना इतना विशिष्ट है कि उसका सामान्यीकरण किया ही नहीं जा सकता। हर व्यक्ति के पास देखा हुआ रहस्य हमेशा रहस्य की तरह इसलिए भी मौजूद रहता है कि उसे किसी दूसरे माध्यम में कह पाना लगभग असम्भव हो जाता है। फिर भी हम इस कोशिश में रहते ही हैं कि देखा हुआ सच लिखे हुए सच में बदल जाए। यह कितने प्रतिशत हो पाता है, यह कहना मुश्किल है, किन्तु यह लिखा हुआ सच अक्सर देखे हुए सच से ज़्यादा आकर्षक, ज़्यादा सम्प्रेषणीय हो जाता है। इस देखी हुई दुनिया के लिखित उद्घाटन पर इतना ज़रूर हुआ कि जो रहस्य किसी एक के देखने का था, वो अनेक के देखने का कारण बना।

—प्रस्तावना से

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Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2017
Edition Year 2017, Ed. 1st
Pages 214p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 21 X 2
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Akhilesh  'Bhopal'

Author: Akhilesh 'Bhopal'

अखिलेश

सुप्रसिद्ध चित्रकार, गद्य लेखक, अनुवादक अखिलेश का जन्म 28 अगस्त, 1956 को इन्दौर, मध्य प्रदेश में हुआ। शिक्षा : नेशनल डिप्लोमा इन पेंटिंग (1978)।

प्रमुख पुस्तकें : ‘दरसपोथी’, ‘अचम्भे का रोना’, ‘शीर्षक नहीं’, ‘मक़बूल फ़िदा हुसेन’, ‘देखना’, ‘उनके बारे में’।

जीवनी : रज़ा : जैसा मैंने देखा, के विरुद्ध : स्वामीनाथन एक पक्ष, मक़बूल और Maqbool : Biography of M. F. Husain (english translation)

अनुवाद : बूझती उँगलियाँ ज. स्वामीनाथन की पुस्तक Perceiving Fingers, समास में प्रकाशित। वफ़ा की अजीब दास्ताँ, आपबीती मार्क शागाल की आत्मकथा, कुकुर नक्षत्र  प्रसिद्ध स्वीडिश लेखिका आग्नेता प्लायेल का उपन्यास Dog Star

सम्पादन : रज़ा पर केन्द्रित कलवार्ता का विशेषांक स्वामीनाथन से संवाद : स्वामीनाथन के साक्षात्कार

संवाद : अखिलेश (पीयूष दईया से बातचीत), कलाकार का देखना (अभिषेक कश्यप से बातचीत), इस प्रकार (राजेश्वर त्रिवेदी से बातचीत)

उन्हें ‘भारत भवन बिनाले सम्मान’, ‘रज़ा अवार्ड’, ‘कला कौस्तु सम्मान’, ‘वागेश्वरी सम्मान’, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ‘सीनियर आर्टिस्ट फेलोशिप’ आदि मिल चुके हैं।

वर्तमान में भोपाल में रहकर कलाकर्म में सक्रिय।

सम्पर्क : [email protected]

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