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Rampur Ki Ramkahani

Author: Dr. Amarnath
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Rampur Ki Ramkahani

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रामपुर की रामकहानी बदलते भारत और खासतौर से वैश्वीकरण के बाद हो रहे तीव्र विकास और उसकी दिशा की कहानी है। विकास के उस दिशा की कहानी है, जिसकी ओर बढ़ते हुए मंजिल तो दूर, हमें पथ भी कहीं नजर नहीं आता।

‘पटरी पर पढ़ाई, मुल्ला की तावीज, भउजी, कृषि संस्कृति की समाधि, जद्दू पंडित का कुनबा, जाति जाति में जाति, अथ यज्ञोपवीत भंजन कथा, ठेके पर हरिनाम’ आदि संस्मरणों के इस संग्रह में छह दशकों का क्रमिक और प्रामाणिक इतिहास पूरी ईमानदारी के साथ रोचक शैली में अंकित है। ये संस्मरण, सत्यकथाएँ हैं। शैली आत्मकथात्मक है। कथा के सूत्र जोड़ने के लिए जहाँ बहुत जरूरी है, वहीं कल्पना का सहारा लिया गया है। 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 182p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Dr. Amarnath

Author: Dr. Amarnath

डॉ. अमरनाथ

11 सितम्बर, 1953 को गाँव—रामपुर बुजुर्ग, जिला—महाराजगंज, उत्तर प्रदेश में जन्मे डॉ. अमरनाथ ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से एम.ए., पी-एच.डी. की उपाधि अर्जित की।

हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के बीच सेतु निर्मित करने एवं भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा के उद्देश्य से ‘अपनी भाषा’ नामक संस्था के गठन और संचालन में केन्द्रीय भूमिका। संस्था की पत्रिका ‘भाषा विमर्श’ का सन् 2000 से 2020 तक सम्पादन। हिन्दी परिवार को टूटने से बचाने और उसकी बोलियों को हिन्दी के साथ संगठित रखने के उद्देश्य से ‘हिन्दी बचाओ मंच’ का गठन और उसकी ओर से राष्ट्रव्यापी जन-जागरण अभियान का नेतृत्व। अपने गाँव में ‘श्री चंद्रिका शर्मा फूला देवी स्मृति सेवा ट्रस्ट’ का गठन और उसके मुख्य ट्रस्टी। ट्रस्ट की ओर से ‘ग्राम स्वराज पुस्तकालय’ का संचालन, उसकी पत्रिका ‘गाँव’ का सम्पादन एवं ग्राम केन्द्रित अन्य सामाजिक कार्यों में संलग्न।

‘हिन्दी आलोचना का आलोचनात्मक इतिहास’, ‘हिन्दी आलोचना की पारिभाषिक शब्दावली’, ‘आजाद भारत के असली सितारे’ (दो खण्ड), ‘नारी का मुक्ति संघर्ष’, ‘हिन्दी जाति’, ‘आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और परवर्ती आलोचना’, ‘आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का काव्य-चिन्तन’ आदि मौलिक कृतियों का प्रणयन एवं ‘समकालीन शोध के आयाम’, ‘हिन्दी भाषा का समाजशास्त्र’, ‘बाँसगाँव की विभूतियाँ’ आदि का सम्पादन किया।

हिन्दी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष।

ई-मेल : [email protected]

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