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Daste-Tahe-Sang-Paper Back

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9789360861520
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नज़्मों, ग़ज़लों, क़तआत और कुछ अन्य रचनाओं के इस संकलन में फ़ैज़ की बेहद मशहूर नज़्मों में से एक ‘आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो’ भी शामिल है। इस नज़्म को उन्होंने 1959 में लिखा था। लाहौर की गलियों से उन्हें मय ज़ंजीरों के घोड़ागाड़ी से क़िला लाहौर की टॉर्चर सेल ले जाया गया था। इस नज़्म के पीछे उनका वही अनुभव है। हर हाल में आज़ादी के शैदाई फ़ैज़ की यह नज़्म उनकी शख़्सियत और शायरी दोनों की ऊँचाई को बयान करती है। 1960 के दशक के शुरुआती सालों में प्रकाशित ‘दस्ते-तहे-संग’ में उस दौर में लिखी हुई अन्य नज़्में, ग़ज़लें और क़तआत भी संकलित हैं जिनमें से कुछ मास्को, बम्बई और लन्दन में भी लिखी गईं। कविताओं के अलावा इस संकलन का ख़ास आकर्षण फ़ैज़ की एक तक़रीर है जो उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय लेनिन शांति पुरस्कार ग्रहण करते हुए उर्दू में दी थी। ‘फ़ैज़... अज़ फ़ैज़’ शीर्षक से उन्हीं का लिखा हुआ एक और आलेख भी यहाँ आप पाएँगे जिसमें वे अपने शुरुआती दिनों के बारे में बताते हैं और उस दौरान लिखी गई कविताओं की पृष्ठभूमि से भी हमें अवगत कराते हैं।

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Abdul Bismillah
Editor Not Selected
Publication Year 2024
Edition Year 2024, Ed. 1st
Pages 80p
Price ₹199.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Faiz Ahmed 'Faiz'

Author: Faiz Ahmed 'Faiz'

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का जन्म 13 फ़रवरी, 1911 को सियालकोट में हुआ। उन्होंने 1936 में प्रगतिशील लेखक संघ की एक शाखा पंजाब में आरम्भ की। 1935 में एम.ए.ओ. कॉलेज, अमृतसर और बाद में हेली कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, लाहौर में अध्यापन किया। 1938-1942 के दौरान उर्दू मासिक ‘अदबे लतीफ़’ के सम्पादक रहे। कुछ समय तक ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भी रहे। 1964 में लन्दन से वापस आने के बाद वे कराची में अब्दुल्लाह हारून कॉलेज के प्रिंसिपल नियुक्त हुए। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘नक़्श-ए-फ़रियादी’, ‘दस्ते-सबा’, ‘ज़िन्दाँनामा’, ‘मीज़ान’, ‘दस्ते-तहे-संग’, ‘सरे-वादी-ए-सीना’, ‘शामे-श्‍हरे-याराँ’, ‘मेरे दिल मेरे मुसाफ़िर’, ‘सारे सुख़न हमारे’ (फ़ैज़ समग्र) लन्दन से और ‘नुस्ख़हा-ए-वफ़ा’ (फ़ैज़ समग्र) पाकिस्तान से। उन्हें ‘लेनिन पीस प्राइज़’, ‘द पीस प्राइज़’, ‘निशाने-इम्तियाज़’ (मरणोपरान्त) से नवाज़ा गया। 1984 में मृत्यु से पहले ‘नोबेल प्राइज़’ के लिए भी उनका नामांकन हुआ।

20 नवम्बर, 1984 को लाहौर में उनका निधन हुआ।

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