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Daste-Saba-Paper Back

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दस्ते-सबा’ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का दूसरा कविता-संग्रह है, जिसका न सिर्फ़ उनके साहित्य में, बल्कि समूचे प्रगतिशील साहित्य में ऐतिहासिक महत्त्व है। यह जब नवम्बर 1952 में प्रकाशित हुआ था, तब फ़ैज़ रावलपिंडी ‘साज़िश’ मुक़दमे के तहत हैदराबाद सेंट्रल जेल (पाकिस्तान) में बन्द थे।

कॉलेज के दिनों में रोमान से भरपूर फ़ैज़ ने देश-दुनिया की जिन सच्चाइयों का सामना करते हुए ‘ग़मे-जानाँ’ और ‘ग़मे-दौराँ’ को एक ही तजुर्बे के दो पहलू माना था, वे और भी ठेठ सूरत में उनके सामने आ चुकी थीं। लेकिन अब इस तजुर्बे के साथ एक और चीज़ जुड़ चुकी थी—जेल का तजुर्बा। फ़ैज़ ने इसका ज़िक्र करते हुए ख़ुद लिखा है—‘जेलख़ाना आशिक़ी की तरह ख़ुद एक बुनियादी तजुर्बा है, जिसमें फ़िक्र-ओ-नज़र का एकाध नया दरीचा ख़ुद-ब-ख़ुद खुल जाता है।’ इसलिए इस संग्रह में हम फ़ैज़ के उस जज़्बे को और पुरज़ोर होता देख सकते हैं, जिसे कभी उन्होंने ‘क्यों न जहाँ का ग़म अपना लें’ कहकर दिखाया था। साथ ही अपने उसूलों के लिए लड़ने का फौलादी इरादा भी कि ‘मता-ए-लौह-ओ-क़लम छिन गई तो क्या ग़म है।’

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2020
Edition Year 2026, Ed 4th
Pages 96p
Price ₹199.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 0.5
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Faiz Ahmed 'Faiz'

Author: Faiz Ahmed 'Faiz'

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का जन्म 13 फ़रवरी, 1911 को सियालकोट में हुआ। उन्होंने 1936 में प्रगतिशील लेखक संघ की एक शाखा पंजाब में आरम्भ की। 1935 में एम.ए.ओ. कॉलेज, अमृतसर और बाद में हेली कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स, लाहौर में अध्यापन किया। 1938-1942 के दौरान उर्दू मासिक ‘अदबे लतीफ़’ के सम्पादक रहे। कुछ समय तक ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भी रहे। 1964 में लन्दन से वापस आने के बाद वे कराची में अब्दुल्लाह हारून कॉलेज के प्रिंसिपल नियुक्त हुए। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘नक़्श-ए-फ़रियादी’, ‘दस्ते-सबा’, ‘ज़िन्दाँनामा’, ‘मीज़ान’, ‘दस्ते-तहे-संग’, ‘सरे-वादी-ए-सीना’, ‘शामे-श्‍हरे-याराँ’, ‘मेरे दिल मेरे मुसाफ़िर’, ‘सारे सुख़न हमारे’ (फ़ैज़ समग्र) लन्दन से और ‘नुस्ख़हा-ए-वफ़ा’ (फ़ैज़ समग्र) पाकिस्तान से। उन्हें ‘लेनिन पीस प्राइज़’, ‘द पीस प्राइज़’, ‘निशाने-इम्तियाज़’ (मरणोपरान्त) से नवाज़ा गया। 1984 में मृत्यु से पहले ‘नोबेल प्राइज़’ के लिए भी उनका नामांकन हुआ।

20 नवम्बर, 1984 को लाहौर में उनका निधन हुआ।

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