Facebook Pixel

Chaturang (Raj)

Translator: Jayshree dutt
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
As low as ₹179.10 Regular Price ₹199.00
10% Off
In stock
SKU
Chaturang (Raj)

- +
Share:
Codicon

‘चतुरंग’ मूलत: जीवन के प्रयोजनों और उनकी उपलब्धि के बीच अनिर्णीत संघर्ष का कथा-प्रयोग है। अब तक हुई तमाम बौद्धिक व्याख्याओं की पहुँच के परे इस संघर्ष का प्रारम्भ कहीं भौतिक परिवेश में दिखाई देता है, कहीं तर्क और विवेक की जुगलबन्दी में और कहीं मनो-जगत में पलती आत्म-प्रताड़णा में; और तीनों ही स्रोतों से यह हमारे आधुनिक विचार-जगत में प्रवेश करता दिखता है। शचीश, श्रीविलास, दामिनी और लीलानन्द स्वामी इसे अपने-अपने स्तर पर जीते हैं—अध्यात्म और भक्ति के दिशाहारा आवेग में, दैहिक प्रेम की तृषार्त-भीरु गुफाओं में, जीवन के भीतर, जीवन के बाहर, प्रभंजन के व्यामोह से घिरे-घिरे। ताऊ जी (जगमोहन) इस कथा को रवीन्द्रनाथ की तत्कालीन सामाजिक चिन्ताओं से जोड़ते हैं, देहरी लाँघने की व्याकुलता तक। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Jayshree dutt
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 128p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
Write Your Own Review
You're reviewing:Chaturang (Raj)
Your Rating
Ravindranath Thakur

Author: Ravindranath Thakur

रवीन्द्रनाथ ठाकुर

जन्म : 7 मई, 1861; को जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी (कोलकाता)।

शिक्षा : स्कूल की पढ़ाई सेंट जेवियर स्कूल में हुई। लन्दन कॉलेज विश्वविद्यालय इंग्लैंड में क़ानून का अध्ययन किया लेकिन 1880 में बिना डिग्री हासिल किए ही वापस आ गए। 1883 में मृणालिनी के साथ विवाह हुआ। 1901 में प्रकृति के सान्निध्य में शान्तिनिकेतन की स्थापना की।

विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के एकमात्र नोबल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नए प्राण फूँकने वाले युगद्रष्टा थे। ऐसे एकमात्र कवि जिनकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं—भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और बांग्लादेश का राष्ट्रीय ‘गान आमार सोनार बांग्ला’।

युगद्रष्टा टैगोर के बहुआयामी सृजन-संसार में ‘गीतांजलि’, ‘पूरबी प्रवाहिनी’, ‘शिशु भोलानाथ’, ‘महुआ’, ‘वनवाणी’, ‘परिशेष’, ‘पुनश्च’, ‘वीथिका शेषलेखा’, ‘चोखेरबाली’, ‘कणिका’, ‘नैवेद्य मायेर खेला’, ‘क्षणिका’, ‘गीताली’, ‘गीतिमाल्य’, ‘कथा ओ कहानी’ और ‘शिशु’ आदि शामिल हैं।

कुछ पुस्तकों का अंग्रेज़ी में अनुवाद भी किया।

निधन : 7 अगस्त, 1941

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top