Channabasavanna : Gyan Ki Nidhi

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Channabasavanna : Gyan Ki Nidhi
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छोटा होने से क्या हुआ? या बड़ा होने से?

ज्ञान के लिए क्या छोटे-बड़े में अन्तर है?

आदि-अनादि से पूर्व, अंडांड

ब्रह्मांड कोटि के उत्पन्न होने से पूर्व

गुहेश्वर लिंग में तुम ही अकेले एक महाज्ञानी

दिखाई पड़े, देखो जी, हे चन्नबसवण्णा!

 

भक्त को शान्तचित्त रहना चाहिए

अपनी स्थिति में सत्यवान रहना चाहिए

सबके हित में वचन बोलना चाहिए

जंगम में निन्दा रहित होकर

सभी प्राणियों को अपने समान मानना चाहिए

तन मन धन, गुरु लिंग जंगम के लिए समर्पित करना चाहिए।

अपात्र को दान न देना चाहिए

सभी इन्द्रियों को अपने वश में रखना चाहिए

यही पहला आवश्यक वृतनेम है देखो

लिंग की पूजा कर प्रसाद पाने के लिए यही मेरे लिए साधन है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2019
Edition Year 2019, Ed. 1st
Pages 136
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
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Editorial Review

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Kashinath Ambalge

Author: Kashinath Ambalge

प्रो. काशीनाथ अंबलगे

आपका जन्म 10 जुलाई, 1947 को मुचलम, बसवकल्याण तालुका, ज़ि‍ला बीदर, कर्नाटक में हुआ।

आपने एम.ए. हिन्दी और कन्नड़ से किया और पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। वर्षों गुलबर्गा विश्वविद्यालय में अध्यापन। फ़िलहाल सेवानिवृत्त।

आपकी कन्नड़ और हिन्दी में कविता, विमर्श, कन्नड़ वचन साहित्य आदि से सम्बन्धित दर्जनों पुस्तकें प्रकाशित। पंजाबी, गुजराती, बांग्ला (हिन्दी द्वारा) और हिन्दी की कई पुस्तकों का कन्नड़ में अनुवाद।

आप ‘महात्मा गांधी हिन्दी पुरस्कार’, ‘कमला गोयनका अनुवाद पुरस्कार’, ‘अम्म पुस्तक पुरस्कार’, ‘गौरव पुरस्कार’ आदि पुरस्कारों से सम्मानित किए जा चुके हैं।

 

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