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Badlav

Author: Parmatma Maurya
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Badlav

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उपन्यास बदलाव सामाजिक न्याय के संघर्ष की दास्तां है जहां विद्यमान व्यवस्था से लाभान्वित वर्ग येन-केन-प्रकारेण व्यवस्था को बनाए रखने के लिए तमाम हथकंडे अपनाता है तो वहीं व्यवस्था से पीड़ित वर्ग व्यवस्था को उखाड़ फेंकने के लिए संघर्ष करता है। सामाजिक न्याय के लिए बहुत लोगों ने लम्बे समय तक संघर्ष किया है तथा इसके लिए अपनी कुर्बानियां दी हैं। उपन्यास बदलाव समाज में समता और बंधुत्व के महत्व को रेखांकित करता है। भारतीय समाज में हो रहे बदलाव का श्रेय अंततः संविधान को जाता है जो नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता आदि की गारंटी देता है। हम भारत के लोग की महान भावना से निर्मित, भारत का संविधान, सभी जाति, धर्म, पंथ, भाषा, वेशभूषा, या क्षेत्र के सभी नागरिकों को समान अधिकार और उत्तरदायित्व देता है। संविधान निर्माताओं ने अनेकता में एकता को पिरोया है। संविधान ने भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया है जहां देश की जनता, अपने लिए, अपने वोट की ताकत से, खुद सरकार चुनती है और चुनी हुई सरकार जनता के लिए जवाबदेह होती है। संविधान निर्माताओं ने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि कोई भी भारतीय नागरिक, अपनी क्षमता और कौशल से, बिना किसी भेदभाव के निम्न स्तर से उच्चतम पद पर आसीन हो सकता है।

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 330p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.4 X 2
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Author: Parmatma Maurya

डॉ. परमात्मा मौर्य

15 जून 1970 को उत्तर प्रदेश, जौनपुर जिले के मुकुरीपुर गांव में, श्री भूषण मौर्य और श्रीमती मेवाती मौर्य के सबसे छोटे पुत्र के रूप में जन्मे डा. परमात्मा मौर्य ने एम. बी. बी. एस. (एस. एन. मेडिकल कॉलेज आगरा), एम. एस. (के. जी. मेडिकल कॉलेज लखनऊ, वर्तमान के. जी. मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ) तथा एम. सीएच. (आई.एम.एस. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी) से अर्जित किया।
साहित्य सेवाः मेडी नोवेल 'आस' और उपन्यास 'विहानं' के अलावा विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित। इनकी रचनाओं में सामाजिक चिंतन, शिक्षा और स्वास्थ्य मुख्य बिंदु होते हैं। आडंबर, पाखंड और अंधविश्वास के विरोधी होने के कारण, इनकी रचनाओं में इसका असर आसानी से देखा जा सकता है। डा. परमात्मा मौर्य, उत्तर प्रदेश के जाने माने न्यूरोसर्जन होने के साथ ही साथ सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी जाने जाते हैं।
सम्मानः मेडी नोवेल 'आस' के लिए गोल्डेन बुक अवार्ड 2024 और उपन्यास 'विहान' के लिए गोल्डेन बुक अवार्ड 2025 और इंटरनेशनल ऑथर एक्सीलेंस अवार्ड 2025 से सम्मानित होने के साथ ही साथ विभिन्न सामाजिक और साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित।
सम्प्रतिः FIJA: Federation of Indian Journalist
and Activist, President of Medical Wing, Lucknow.
सम्पर्कः बी. एन. सी. (भूषण न्यूरोसर्जीकल सेंटर) गोमती नगर विस्तार, लखनऊ, उ. प्र. 226010
ईमेल: [email protected]

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