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Ayushya

Author: Rajvardhan Azad
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Ayushya

जीवन में आस्था और उसके सत्य के अन्वेषण की जिज्ञासा ही ‘आयुष्य’ की मूल प्रेरणा है। इस प्रबन्ध-काव्य में कथा के स्थान विचार की सरिता प्रवाहित होती है जो मानव-जीवन के इस सिरे से लेकर उस सिरे तक जाती है—यानी जन्म से लेकर जीवन के अवसान तक।

आठ सर्गों में विभाजित इस प्रबन्ध-काव्य का प्रत्येक चरण मनु के बाह्य और आन्तरिक जीवन का सम्पूर्ण चित्र प्रस्तुत करता है। एक दार्शनिक की भंगिमा में कवि मनुष्य की ऐहिक यात्रा के अलग-अलग पड़ावों पर ठहरकर उन सारे बिम्बों को सँजोता है, उन पर विचार करता है, जो हमारे अ​​स्तित्व को परिभाषित करते हैं।

बचपन के ललित चित्रों से आरम्भ होकर यह कृति यौवन के सपनों-संघर्षों, प्रौढ़ वय के गाम्भीर्य और वृद्धावस्था के शान्त समतल से होती हुई समय के उस विराट विवर पर समाप्त होती है जहाँ सब कुछ किसी विराट में विलय हो जाता है—जीवन भी, सृष्टि भी; और जिज्ञासु मानव मस्तिष्क जहाँ हठात् जीवन के उद्देश्य का अन्वेषण नए सिरे से करने को व्याकुल हो उठता है।

          जीव का विलोपन या जीवन का विघटन?

          मनुष्य के संसार में अवतरण का प्रयोजन?

आज जब हम सभ्यता के ऐसे चरण में पहुँच गए हैं जहाँ मनुष्य जीवन का मोल शायद कुछ भी नहीं, हर दिन ऐसा लगता है, ‘आयुष्य' की प्रश्नाकुलता को अनुभव करना एक नई दृष्टि की आधार-भूमि बनेगी। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 226p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2
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Rajvardhan Azad

Author: Rajvardhan Azad

राजवर्धन आज़ाद

राजवर्धन आज़ाद नेत्र चिकित्सक (रेटिनल सर्जन) के रूप में विश्वविख्यात हैं। एक प्रसिद्ध चिकित्सक का साहित्यिक रूपान्तरण सुखद संयोग है। डॉ. आज़ाद साहित्य की दुनिया में अपने कहानी-संग्रह ‘सोने का हाथ’ के माध्यम से चर्चित हुए। ‘Poems on Board’ शीर्षक से अंग्रेजी और ‘नीम का शहद’ शीर्षक से उनका हिन्दी कविता-संग्रह प्रकाशित है। 

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