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Antim Adhyay

Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Antim Adhyay (Lok)

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अपने समय में बेहद च‌‌र्चित और विवादास्पद इस उपन्यास के केन्द्र में दाम्पत्य और स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की जटिलताएँ और पिछली सदी के सातवें-आठवे दशक में हिन्दी का साहित्यिक परिदृश्य है।

नरेन्द्र और शकुन्तला—जो निजी तौर पर अपने दाम्पत्य के उस दौर में हैं जब पति-पत्नी एक-दूसरे की तमाम खामियों-खूबियों को जानकर जीवन को नए ढंग से देखना-समझना और अपनी परिस्थितियों से सामंजस्य बनाना सीख रहे होते हैं—एक प्रकाशन-संस्थान चलाते हैं। साहित्यिक रूप से सम्पन्न एक शहर के परिप्रेक्ष्य में यह उपन्यास लेखकीय जीवन की महत्त्वाकांक्षाओं, एक मध्यवर्गीय व्यक्ति की नैतिक कमजोरियों के साथ-साथ उस समय को भी सूक्ष्मता से अंकित करता चलता है जिसे हिन्दी रचनात्मकता के अत्यन्त सक्रिय दौर के रूप में आज भी याद किया जाता है।

तीव्र आवेग से युक्त यह उपन्यास जितना पठनीय है अपनी भाषा-सामर्थ्य के चलते उतना ही रोचक भी है। आधी सदी पहले लिखे गए इस उपन्यास की शब्द-सम्पदा आज के पाठकों और लेखकों को भी, चकित कर सकती है।

‘सती मैया का चौरा’, ‘एक जीनियस की प्रेमकथा’ और ‘भाग्य-देवता’ जैसे उपन्यासों और कई उल्लेखनीय कहानी-संग्रहों के रचियता कथाकार भैरव प्रसाद गुप्त के इस उपन्यास की यह प्रस्तुति निश्चय ही पाठकों को आक‌‌िर्षत करेगी।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 304p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2.5
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Bhairavprasad Gupt

Author: Bhairavprasad Gupt

भैरवप्रसाद गुप्त

जन्म : 7 जुलाई, 1918 को गाँव— सिवानकला, बलिया, उ.प्र.।

शिक्षा : इविंग कॉलेज, इलाहाबाद से स्नातक।

अपने शिक्षक की प्रेरणा से कहानी-लेखन की ओर रुझान हुआ। जगदीशचन्द्र माथुर, शिवदानसिंह चौहान जैसे लेखकों एवं आलोचकों के सम्पर्क और साहित्यक-राजनीतिक परिवेश में उनके रचनात्मक संस्कारों को दिशा मिली।

सन् 1940 में मज़दूर नेताओं से सम्पर्क। सन् 1944 में माया प्रेस, इलाहाबाद से जुड़े। अपने अन्य समकालीनों की तरह आर्य समाज और गाँधीवादी राजनीति की राह से वामपंथी राजनीति की ओर आए। सन् 1948 में वे कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बने।

प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें : उपन्यास—‘शोले’, ‘मशाल’, ‘गंगा मैया’, ‘ज़ंजीरें और नया आदमी’, ‘सत्ती मैया का चौरा’, ‘धरती’, ‘आशा’, ‘कालिन्दी’, ‘रम्भा’, ‘अन्तिम अध्याय’, ‘नौजवान’, ‘एक जीनियस की प्रेमकथा’, ‘भाग्य देवता’, ‘अक्षरों के आगे’ (मास्टर जी), 'छोटी-सी शुरुआत’; कहानी-संग्रह—‘मुहब्बत्त की राहें’, ‘फ़रिश्ता’, ‘बिगडे हुए दिमाग़’, ‘इंसान’, ‘बलिदान की कहानियाँ’, ‘मंज़‍िल’, ‘महफ़‍िल’, ‘सपने का अन्‍त’, ‘आँखों का सवाल’, ‘मंगली की टिकुली’, ‘आप क्या कर रहे हैं?’; नाटक और एकांकी—‘कसौटी’, ‘चंदबरदाई’, ‘राजा का बाण’। सम्पादित पत्रिकाएँ—‘माया’, ‘मनोहर कहानियाँ’, ‘कहानी’, ‘नई कहानियाँ’ आदि ।

निधन : 5 अप्रैल, 1995

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