Aadhar Se Kiska Uddhar

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Aadhar Se Kiska Uddhar
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‘‘रीतिका खेड़ा की किताब भारी सरकारी प्रचार के साथ सारे देश में लागू की गई विवादित आधार योजना के बारे में एक सामयिक और सटीक दस्तावेज़ है। यह बताती है कि कैसे सर्वोच्च न्यायालय और जानकारों की सलाह की अनदेखी करते हुए सरकार ने आधार कार्ड को फटाफट तमाम सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों के लिए अनिवार्य बना दिया। इससे उपजी विसंगतियों और जनता के संवैधानिक अधिकारों को पहुँचे गम्भीर नुकसान पर लेखिका ने बड़ी ईमानदारी से रोशनी डाली है। किताब हमको आधार से जमा किए गए भारतीय उपभोक्ता की बाबत अनमोल डाटा का, आगे मुनाफ़ाख़ोर बाज़ार द्वारा सम्भावित दुरुपयोग के ख़िलाफ़ चेतावनी देती है। एक जटिल विषय के सहज हिन्दी अनुवाद ने इस किताब को सरल और आमफ़हम बनाया है।’’    

—मृणाल पाण्डे

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Language Hindi
Format Paper Back
Publication Year 2019
Edition Year 2019, 1st Ed.
Pages 128p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan - Sarthak
Dimensions 19.5 X 13 X 1
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Editorial Review

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Reetika Khera

Author: Reetika Khera

रीतिका खेड़ा

रीतिका खेड़ा आई.आई.एम., अहमदाबाद में इकॉनॉमिक्स और पब्लिक सिस्टम ग्रुप की सहायक प्रोफ़ेसर के तौर पर कार्यरत हैं। इन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स से पीएच.डी. की है और वे सात वर्षों तक आई.आई.टी., दिल्ली में अध्यापन कर चुकी हैं जिसके बाद इन्होंने बतौर सहायक प्रोफ़ेसर आई.आई.एम., अहमदाबाद में अध्यापन प्रारम्भ किया। रीतिका के शोधकार्य ने भारत की अनेक सरकारी नीतियों के इर्द-गिर्द सार्थक बहस को जन्म दिया। इनके लेख लम्बे समय से अनेक विधाओं में छपते रहे हैं और ये भारत में सरकारी नीतियों को लोगों के बीच बातचीत का हिस्सा बनाने में लगातार कार्यरत हैं।

 

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