मिर्ज़ा हादी रुस्वा का नाम अपने उपन्यास ‘उमराव जान अदा’ की शोहरत के सबब किसी परिचय का मोहताज नहीं है। मगर उन्होंने और भी बहुत से दूसरे उपन्यास लिखे। मिर्ज़ा रुस्वा मानते थे कि उपन्यासकार को अपने आस-पास मौजूद दुनिया की कहानियाँ ही लिखनी चाहिए। इसीलिए उनके तक़रीबन सभी उपन्यासों में अवध और ख़ास तौर पर लखनऊ को अलग-अलग रूप में पेश किया गया है। मिर्ज़ा हादी रुस्वा का ये उपन्यास बदलते हुए ज़माने में अपनी पुरानी, ख़स्ता और दक़ियानूसी सोच की दलदल में फँसे हुए किरदारों का क़िस्सा बयान करता है। ये क़िस्सा अपनी बुनत की वजह से बेहद दिलचस्प तो है ही, साथ ही इसमें किरदार-तराशी भी कमाल की है। निशांत कौशिक ने इसका तर्जुमा बेहद सरल ज़बान में किया है, जिसकी वजह से अस्ल ज़बान का लुत्फ़ भी नहीं कम होता और क़िस्से की चमक भी अपनी जगह क़ायम रहती है।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Paper Back |
| Translator | Nishant Kaushik |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2026 |
| Edition Year | 2026, Ed. 1st |
| Pages | 176p |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Dimensions | 20 X 13 X 1 |