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Zaat-E-Sharif

Translator: Nishant Kaushik
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Zaat-E-Sharif

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मिर्ज़ा हादी रुस्वा का नाम अपने उपन्यास ‘उमराव जान अदा’ की शोहरत के सबब किसी परिचय का मोहताज नहीं है। मगर उन्होंने और भी बहुत से दूसरे उपन्यास लिखे। मिर्ज़ा रुस्वा मानते थे कि उपन्यासकार को अपने आस-पास मौजूद दुनिया की कहानियाँ ही लिखनी चाहिए। इसीलिए उनके तक़रीबन सभी उपन्यासों में अवध और ख़ास तौर पर लखनऊ को अलग-अलग रूप में पेश किया गया है। मिर्ज़ा हादी रुस्वा का ये उपन्यास बदलते हुए ज़माने में अपनी पुरानी, ख़स्ता और दक़ियानूसी सोच की दलदल में फँसे हुए किरदारों का क़िस्सा बयान करता है। ये क़िस्सा अपनी बुनत की वजह से बेहद दिलचस्प तो है ही, साथ ही इसमें किरदार-तराशी भी कमाल की है। निशांत कौशिक ने इसका तर्जुमा बेहद सरल ज़बान में किया है, जिसकी वजह से अस्ल ज़बान का लुत्फ़ भी नहीं कम होता और क़िस्से की चमक भी अपनी जगह क़ायम रहती है। 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Nishant Kaushik
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 176p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Mirza Haadi 'Ruswa'

Author: Mirza Haadi 'Ruswa'

मिर्ज़ा हादी रुस्वा

मूलतः शायर लेकिन लोकप्रिय हुए उपन्यासकार के नाते। सन् 1857 ई. के विद्रोह का काल उनके जीवन और रचनाकर्म का समय रहा है। शायरी की कोई पुस्तक उपलब्ध नहीं है। वे लखनऊ के रहनेवाले थे। मशहूर तवायफ़ उमराव जान ‘अदा’ को निजी तौर पर जानते थे। उसके जीवन-संघर्ष ने उन्हें अन्तस तक आलोड़ित किया तथा वह उपन्यास लिखने को प्रेरित हुए। उनके शेष जीवन के सम्बन्ध में अधिक जानकारी नहीं मिलती।

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