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Voh Apana Chehra-Paper Back

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9788126727599
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क़रीब-क़रीब अमानवीय और जड़ होता जाता संसार गोविन्द मिश्र के लेखन की मुख्य चिन्ताओं में से है। जहाँ वे एक परिवेश का केवल भीतरी-बाहरी कच्चा चिट्ठा-भर प्रस्तुत करते हैं, वहाँ भी सर्जनात्मक व्यथा मानवीयता और मूल्यों के न होने की ही होती है। गोविन्द मिश्र के लेखन का मूल स्वर सकारात्मक है जो उनकी रचनाओं में उत्तरोत्तर साफ़ होता चला गया है।

'वह अपना चेहरा’ एक तलाश है जो चेहरों से शुरू होकर जीवन-पद्धति एवं मान्यताओं से होती हुई नैतिकता और मूल्यों तक जाती है। नौकरशाही का परिवेश, दफ़्तरी मानसिकता, फ़ाइलों-इमारतों की दुनिया यहाँ एक ऐसे तनाव के माध्यम से उभारे गए हैं जो जितना उग्र है, उतना ही फ़िज़ूल—लालफीताशाही के अपने स्वभाव की तरह। यहाँ चेहरे भी फ़ाइलों की तरह घूम रहे हैं, 'अपना’ चेहरा 'वह’ हो जाता है, वही जिसके ख़िलाफ़ उसकी लड़ाई थी। चरित्रों की गहरी पकड़, कलात्मकता और भाषा का एक अपने ढंग का खुरदुरापन इस उपन्यास को विशिष्ट बनाते हैं।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 1985
Edition Year 2019, Ed. 4th
Pages 128p
Price ₹150.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Govind Mishra

Author: Govind Mishra

गोविन्द मिश्र

जन्म : 1 अगस्त, 1939

गोविन्द मिश्र समकालीन कथा-साहित्य में एक ऐसी उपस्थिति हैं जिनकी वरीयताओं में लेखन सर्वोपरि है, जिनकी चिन्ताएँ समकालीन समाज से उठकर ‘पृथ्वी पर मनुष्य’ के रहने के सन्दर्भ तक जाती हैं और जिनका लेखन-फलक ‘लाल पीली ज़मीन’ के खुरदरे यथार्थ, ‘तुम्हारी रोशनी में’ की कोमलता और काव्यात्मकता, ‘धीरसमीरे’ की भारतीय परम्परा की खोज, ‘हुज़ूर दरबार’ और ‘पाँच आँगनोंवाला घर’ के इतिहास और अतीत के सन्दर्भ में आज के प्रश्नों की पड़ताल—इन्हें एक साथ समेटे हुए है।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘वह अपना चेहरा’, ‘उतरती हुई धूप’, ‘लाल पीली ज़मीन’, ‘हुज़ूर दरबार’, ‘तुम्हारी रोशनी में’, ‘धीरसमीरे’, ‘पाँच आँगनोंवाला घर’, ‘फूल...इमारतें और बन्दर’, ‘कोहरे में क़ैद रंग’, ‘धूल पौधों पर’, ‘अरण्यतंत्र’, ‘शाम की ​​झिलमिल’, ‘ख़िलाफ़त’, ‘हवा में चिराग़’, ‘राह दर बदर’ (उपन्यास); ‘पगला बाबा’, ‘आसमान...कितना नीला’, ‘हवाबाज़’, ‘मुझे बाहर निकालो’, ‘नये सिरे से’ (कहानी-संग्रह); ‘कहानी समग्र’ (सम्पूर्ण कहानियाँ तीन खंडों में); ‘धुंध-भरी सुर्ख़ी’, ‘दरख़्तों के पार...शाम’, ‘झूलती जड़ें’, ‘परतों के बीच’ (यात्रा-वृत्त); ‘साहित्य का सन्दर्भ’, ‘कथा भूमि’, ‘संवाद अनायास’, ‘समय और सर्जना’, ‘साहित्य, साहित्यकार और प्रेम’, ‘सान्निध्य-साहित्यकार’ (निबन्ध); ‘ओ प्रकृति माँ!’ (कविता); ‘मास्टर मनसुखराम’, ‘कवि के घर में चोर’, ‘आदमी का जानवर’ (बाल-साहित्य); ‘रंगों की गंध’ (समग्र यात्रा-वृत्त दो खंडों में); ‘चुनी हुई रचनाएँ’ (तीन खंडों में); ‘गोविन्द मिश्र रचनावली’ : संपादक नन्दकिशोर आचार्य (बारह खंडों में)।

उन्हें 1998 के ‘व्यास सम्मान’, 2008 में ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, 2011 में ‘भारत-भारती सम्मान’, 2013 के ‘सरस्वती सम्मान’ और 2024 के ‘आकाशदीप सम्मान’ समेत कई पुरस्कारों व सम्मानों से सम्मानित किया गया है।

ई-मेल : [email protected]

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