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Rakesh Aur Parivesh : Patron Mein-Hard Cover

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9788171192144
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कोई व्यक्ति और विशेषत: रचनाकार अपने बारे में क्या कहता है—इससे अधिक महत्त्वपूर्ण और बड़ा सच यह है कि दूसरे उसके बारे में क्या कहते हैं? यह पत्र-संग्रह दूसरों के आईने में राकेश के व्यक्तित्व, कृतित्व और परिवेश की एक प्रामाणिक तस्वीर पेश करता है। यहाँ केन्द्र में राकेश हैं और परिधि पर उनके समकालीन।

लेखकीय आत्म-सम्मान और अपने अधिकारों के लिए हर किसी से कभी भी और कहीं भी त्याग-पत्र देने, वॉक आउट करने और लड़ने-झगड़ने को सदैव तत्पर, निश्छल आत्मीयता की तलाश में दर-दर भटकते सैलानी, भीतर से असुरक्षित, अकेले और बेचैन लेकिन बाहर से छतफाड़ ठहाके लगानेवाले हरदिल अज़ीज़ अनूठे दोस्त, एक साथ ज़बरदस्त बौद्धिक एवं अहंकारी तथा अत्यधिक संवेदनशील और भावुक अपने सिद्धान्तों के लिए अडिग और अटूट तथा अपने लेखन के लिए अत्यन्त अस्थिर, बेसब्र और बेचैन मोहन राकेश के अन्तर्विरोधों की कोई सीमा नहीं है। इस पुस्तक में संकलित राकेश और उनके सहयात्रियों के 721 पत्र उनके जटिल व्यक्तित्व को, पाठकों के लिए, बड़े प्रामाणिक एवं विश्वसनीय रूप में एकदम पारदर्शी बना देते हैं। इनमें उनके चेतन-अवचेतन के अँधेरे-गुह्य कोनों और परिवेश के नेपथ्य की जीवन्त छवियों एवं धड़कनों को साफ़-साफ़ पहचाना और सुना जा सकता है।

नि:सन्देह, यह पुस्तक राकेश के पाठकों, अध्येताओं और शोधार्थियों को राकेश के संघर्षमय जीवन और वैविध्यपूर्ण रचनाकर्म के मर्म को गहराई से जानने-समझने में न केवल रोचक, दुर्लभ एवं महत्त्वपूर्ण सामग्री ही उपलब्ध कराती है, बल्कि हिन्दी के पत्र-साहित्य में एक उल्लेखनीय भूमिका भी निभाती है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 1995
Edition Year 1995, Ed. 1st
Pages 783p
Price ₹1,500.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 4.5
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Jaidev Taneja

Author: Jaidev Taneja

जयदेव तनेजा

जयदेव तनेजा का जन्म 15 मार्च, 1943 को ओकाड़ा (अब पाकिस्तान में) में हुआ। उनकी मोहन राकेश सम्बन्धी प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘लहरों के राजहंस : विविध आयाम’, ‘मोहन राकेश : रंग-शिल्प और प्रदर्शन’, ‘मोहन राकेश : अधूरे रिश्तों की पूरी दास्तान’, ‘मोहन राकेश रचनावली’ (13 खंड), ‘राकेश और परिवेश : पत्रों में’, ‘एकत्र’ (मोहन राकेश की अप्रकाशित-असंकलित रचनाएँ), ‘पुनश्च’ (राकेश और अश्क दम्पति का पत्राचार), ‘नाट् य-विमर्श : मोहन राकेश’, ‘मेरे साक्षात्कार’, ‘दस प्रतिनिधि कहानियाँ’, ‘पूर्वाभ्यास’ (मोहन राकेश के आरम्भिक एकांकी), ‘काँपता हुआ दरिया’ (मोहन राकेश का उपन्यास)।    

वे ‘श्रेष्ठ साहित्यिक कृति पुरस्कार’ (हिन्दी अकादमी), ‘विश्व रंगमंच दिवस सम्मान’ (दिल्ली नाट् य संघ), ‘साहित्यकार सम्मान’ (हिन्दी अकादमी), ‘पं. सत्यदेव दुबे राष्ट्रीय सम्मान’ (रास कलामंच हरियाणा), ‘नाटक सम्मान’ (हिन्दी अकादमी), ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित हैं। ‘नट सम्राट’ (दिल्ली), ‘अंक’ (मुम्बई) ने उन्हें सम्मानित किया है। 2024 में ‘पंचानन पाठक जीवन गौरव सम्मान’ तथा ‘कारवाँ-ए-हबीब सम्मान’ से भी नवाजे गए हैं।

ई-मेल : [email protected]

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