कहाँ आ के रुकने थे रास्ते! कहाँ मोड़ था! उसे भूल जा
वो जो मिल गया उसे याद रख, जो नहीं मिला, उसे भूल जा
वो तिरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं
दिल-ए-बेख़बर मिरी बात सुन, उसे भूल जा, उसे भूल जा
मैं तो गुम था तेरे ही ध्यान में, तिरी आस तेरे गुमान में
सबा कह गई मिरे कान में, मिरे साथ आ, उसे भूल जा
किसी आँख में नहीं अश्क-ए-ग़म तिरे बाद कुछ भी नहीं है कम
तुझे ज़िन्दगी ने भुला दिया, तू भी मुस्कुरा, उसे भूल जा
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Paper Back |
| Translator | Anuradha Sharma |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2026 |
| Edition Year | 2026, Ed. 1st |
| Pages | 160p |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Dimensions | 21.5 X 14 X 1 |