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Prasangvash : Sahitya Aur Samaj ki Chand Bahasen

Author: Pranay Krishna
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
As low as ₹221.25 Regular Price ₹295.00
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Prasangvash : Sahitya Aur Samaj ki Chand Bahasen

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यह पुस्तक ऐसे लेखों का संग्रह है जो पिछली एक चौथाई सदी से कुछ अधिक समय में भिन्न-भिन्न प्रसंगों तथा अवसरों पर लिखे गए हैं। इन लेखों के विषय नए-पुराने सभी तरह के हैं, लेकिन उन पर चली बहसें नितान्त समकालीन होने के चलते लेखों का सम्बन्ध भी समकालीन वैचारिक परिवेश से है-राजनीति, समाज और साहित्य के अनेक सवाल व्याख्या, पुनर्व्याख्या, दुर्व्याख्या की अनिवार्य प्रक्रियाओं से गुजरते हैं- व्याख्या की राजनीति में हस्तक्षेप ही इन लेखों का मुख्य मकसद है।
पुस्तक के कई लेख पहले भाषण के रूप में सामने आए, बाद को प्रकाशित होने के बाद लेख बन गए। सभी लेख जिन पत्रिकाओं में, जिस साल प्रकाशित हुए, उनका उल्लेख हर लेख के आखीर में कर दिया गया है, भाषणों के सन्दर्भ भी इसी प्रकार दर्ज हैं, कुछेक ऐसे भाषण भी है, जो लेख रूप में प्रकाशित नहीं हुए थे।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 224p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Pranay Krishna

Author: Pranay Krishna

प्रणय कृष्ण

जन्म : इलाहबाद में।

उच्च शिक्षा : इलाहबाद विश्वविद्यालय एवं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय।

सन् 1990 से छात्र राजनीति में सक्रियता, 1993-94 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। सन् 1994 से सी.पी.आई. (एम.एल.) की राजनीति के हमसफ़र। फ़‍िलहाल ‘जन संस्कृति मंच’ और मानवाधिकार संस्था 'पीपुल्स यूनियन फ़ॉर ह्यूमन राइट्स' के मोर्चे पर सक्रिय। 2002 में गुजरात नरसंहार पर 'पीपुल्स यूनियन फ़ॉर ह्यूमन राइट्स' की जाँच रिपोर्ट तैयार की। ‘समकालीन जनमत’ के सम्‍पादक रहे। 1996 से इलाहबाद विश्व विद्यालय के हिन्‍दी विभाग में प्राध्यापन।

प्रमुख कृतियाँ : ‘उत्तर-औपनिवेशिकता के स्रोत’, ‘शती स्मरण’, ‘प्रसंगवश : साहित्य और समाज की चंद बहसें’, ‘मैनेजर पाण्डेय का आलोचनात्मक संघर्ष’, ‘समकालीन कविता : एक साक्ष्य विमर्श और आलोचना’।

सम्मान : 'उत्तर-औपनिवेशिकता के स्रोत' नामक पुस्तक के लिए 2008 में ‘देवीशंकर अवस्थी सम्मान’।

सम्प्रति : इलाहबाद विश्वविद्यालय के हिन्‍दी विभाग में प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत।

 

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