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Panch Aangnon Wala Ghar-Paper Back

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9788183612371
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क़रीब पचास वर्षों में फैली ‘पाँच आँगनों वाला घर’ के सरकने की कहानी दरअसल तीन पीढ़ियों की कहानी है—एक वह जिसने 1942 के आदर्शों की साफ़ हवा अपने फेफड़ों में भरी, दूसरी वह जिसने उन आदर्शों को धीरे-धीरे अपनी हथेली से झरते देखा और तीसरी वह जो उन आदर्शों को सिर्फ़ पाठ्य-पुस्तकों में पढ़ सकी। परिवार कैसे उखड़कर सिमटता हुआ क़रीब-क़रीब नदारद होता जा रहा है—व्यक्ति को उसकी वैयक्तिकता के सहारे अकेला छोड़कर! गोविन्द मिश्र के इस सातवें उपन्यास को पढ़ना अकेले होते जा रहे आदमी की उसी पीड़ा से गुज़रना है।

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2008
Edition Year 2025, Ed. 4th
Pages 216p
Price ₹299.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Govind Mishra

Author: Govind Mishra

गोविन्द मिश्र

जन्म : 1 अगस्त, 1939

गोविन्द मिश्र समकालीन कथा-साहित्य में एक ऐसी उपस्थिति हैं जिनकी वरीयताओं में लेखन सर्वोपरि है, जिनकी चिन्ताएँ समकालीन समाज से उठकर ‘पृथ्वी पर मनुष्य’ के रहने के सन्दर्भ तक जाती हैं और जिनका लेखन-फलक ‘लाल पीली ज़मीन’ के खुरदरे यथार्थ, ‘तुम्हारी रोशनी में’ की कोमलता और काव्यात्मकता, ‘धीरसमीरे’ की भारतीय परम्परा की खोज, ‘हुज़ूर दरबार’ और ‘पाँच आँगनोंवाला घर’ के इतिहास और अतीत के सन्दर्भ में आज के प्रश्नों की पड़ताल—इन्हें एक साथ समेटे हुए है।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘वह अपना चेहरा’, ‘उतरती हुई धूप’, ‘लाल पीली ज़मीन’, ‘हुज़ूर दरबार’, ‘तुम्हारी रोशनी में’, ‘धीरसमीरे’, ‘पाँच आँगनोंवाला घर’, ‘फूल...इमारतें और बन्दर’, ‘कोहरे में क़ैद रंग’, ‘धूल पौधों पर’, ‘अरण्यतंत्र’, ‘शाम की ​​झिलमिल’, ‘ख़िलाफ़त’, ‘हवा में चिराग़’, ‘राह दर बदर’ (उपन्यास); ‘पगला बाबा’, ‘आसमान...कितना नीला’, ‘हवाबाज़’, ‘मुझे बाहर निकालो’, ‘नये सिरे से’ (कहानी-संग्रह); ‘कहानी समग्र’ (सम्पूर्ण कहानियाँ तीन खंडों में); ‘धुंध-भरी सुर्ख़ी’, ‘दरख़्तों के पार...शाम’, ‘झूलती जड़ें’, ‘परतों के बीच’ (यात्रा-वृत्त); ‘साहित्य का सन्दर्भ’, ‘कथा भूमि’, ‘संवाद अनायास’, ‘समय और सर्जना’, ‘साहित्य, साहित्यकार और प्रेम’, ‘सान्निध्य-साहित्यकार’ (निबन्ध); ‘ओ प्रकृति माँ!’ (कविता); ‘मास्टर मनसुखराम’, ‘कवि के घर में चोर’, ‘आदमी का जानवर’ (बाल-साहित्य); ‘रंगों की गंध’ (समग्र यात्रा-वृत्त दो खंडों में); ‘चुनी हुई रचनाएँ’ (तीन खंडों में); ‘गोविन्द मिश्र रचनावली’ : संपादक नन्दकिशोर आचार्य (बारह खंडों में)।

उन्हें 1998 के ‘व्यास सम्मान’, 2008 में ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, 2011 में ‘भारत-भारती सम्मान’, 2013 के ‘सरस्वती सम्मान’ और 2024 के ‘आकाशदीप सम्मान’ समेत कई पुरस्कारों व सम्मानों से सम्मानित किया गया है।

ई-मेल : [email protected]

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