Facebook Pixel

Nihshabd Noopur : Rumi Ki 100 Gazalein

Author: Rumi
Translator:
Editor: Balram Shukla
Edition: 2025, Ed. 2nd
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
As low as ₹269.10 Regular Price ₹299.00
10% Off
In stock
SKU
Nihshabd Noopur : Rumi Ki 100 Gazalein

- +
Share:
Codicon

रूमी ईरान के सर्वाधिक प्रसिद्ध कवि हैं। उनकी ग़ज़लें ऊर्जस्वी काव्य के दुर्लभ उदाहरणों में से हैं। रूमी की ग़ज़लें सामान्य कविताओं की तुलना में अलग हैं। इनकी प्रत्येक ग़ज़ल का हर शे’र आत्म-अनुभूति की परिपूर्णता से उच्छलित है। इनकी कविता केवल काव्यात्मक चमत्कारों को प्रदर्शित कर पाठकों को लुब्ध करने में पर्यवसित नहीं होती, बल्कि दिल से निकलकर मस्तिष्क और हृदय को भिगोती हुई आत्मा तक का स्पर्श कर लेती है। प्रस्तुत पुस्तक उनकी चुनिन्दा 100 ग़ज़लों का अनुवाद है। इस पुस्तक के माध्यम से रूमी पहली बार सीधे फ़ारसी से हिन्दी में अनूदित हुए हैं। इसमें सबसे पहले फ़ारसी ग़ज़लों का देवनागरी में लिप्यन्तरण प्रस्तुत किया गया है, फिर साथ में ही उनका हिन्दी अनुवाद दिया गया है। अन्त में मूल ग़ज़लें फ़ारसी लिपि में भी रखी गई हैं। पुस्तक के अन्त में दिए गए अनेक परिशिष्टों के माध्यम से फ़ारसी काव्य-भाषा को समझने के महत्त्वपूर्ण उपकरण जुटाए गए हैं। ग़ज़लों में प्रयुक्त सभी छन्दों को ईरानी तथा भारतीय काव्यशास्त्रीय रीति से समझाया गया है। क्लासिकल फ़ारसी कविता के सम्यक् परिचय के लिए आवश्यक संक्षिप्त फ़ारसी व्याकरण जोड़ा गया है। अन्त में प्रत्येक शब्द का अर्थ भी दिया गया है। इस प्रकार मूल से जुड़े रसपूर्ण अनुवाद की प्रस्तुति के साथ ही यह पुस्तक रूमी-रीडर के तौर पर भी उपयोग में आने योग्य है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Editor Balram Shukla
Publication Year 2018
Edition Year 2025, Ed. 2nd
Pages 432p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 3.5
Write Your Own Review
You're reviewing:Nihshabd Noopur : Rumi Ki 100 Gazalein
Your Rating
Rumi

Author: Rumi

रूमी

मौलाना मोहम्मद जलालुद्दीन रूमी फ़ारसी भाषा के महान सूफ़ी कवि थे। उनका जन्म
30 सितम्बर, 1207 को वर्तमान अफ़ग़ानिस्तान के बल्ख़ शहर में हुआ था। रूमी की ‘मसनवी’ को विश्व साहित्य की महानतम रचनाओं में शुमार किया जाता है। उनकी कविताओं में प्रेम और अध्यात्म का सुन्दर मेल दिखाई देता है। उन्होंने गीत, संगीत और नृत्य के माध्यम से ईश्वर तक पहुँचने की बात कही है। विश्व की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में उनकी कविताओं के अनुवाद हुए हैं।
17 दिसम्बर, 1273 को कोन्या (वर्तमान तुर्की) में उनका निधन हुआ।

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top