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Mughal Saltanat Ki Arthvyavastha C. 1595 : A Statistical Study

Author: Shireen Moosvi
Translator:
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Mughal Saltanat Ki Arthvyavastha C. 1595 : A Statistical Study

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‘मुग़ल सल्तनत की अर्थव्यवस्था’ इतिहास की एक बेहद चर्चित और प्रशंसित कृति है। यह पुस्तक वर्ष 1595 के आसपास के मुग़ल भारत की अर्थव्यवस्था का सांख्यिकीय विश्लेषण करती है।

मुगल साम्राज्य के महान आधिकारिक ग्रन्थ ‘आइन-ए-अकबरी’ की प्रारंभिक पांडुलिपियों में मौजूद समृद्ध सांख्यिकीय सामग्री का विश्लेषण करते हुए, यह पुस्तक तत्कालीन आर्थिक स्थितियों पर व्यापक प्रकाश डालती है, साथ ही इस विषय में प्रचलित विचारों-धारणाओं को चुनौती भी देती है और उनमें संशोधन भी करती है।

प्रसिद्ध इतिहासकार शीरीं मूसवी की यह मौलिक पुस्तक मुग़ल सल्तनत की अर्थव्यवस्था के मात्रात्मक विश्लेषण द्वारा उसी तरह एक नया आयाम स्थापित करती है जैसा कि समकालीन अर्थशास्त्र में किया जाता है। इस पुस्तक का पहला संस्करण 1987 में प्रकाशित हुआ था, उसके बाद इसका जो दूसरा संस्करण प्रकाशित हुआ उसमें न सिर्फ़ सकल घरेलू उत्पाद पर एक नया अध्याय इसमें जोड़ा गया बल्कि अन्य अध्यायों को भी अद्यतन किया गया, यह उसी संस्करण का अनुवाद है।

मुगल साम्राज्य की अर्थव्यवस्था के कामकाज और उसकी सम्भावित विकास क्षमताओं में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए यह पुस्तक अपरिहार्य है। उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में भारत की औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था की संरचना के साथ मध्यकालीन अर्थव्यवस्था की तुलना के लिए भी यह एक ठोस आधार प्रदान करती है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 464p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2.5
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Author: Shireen Moosvi

शीरीं मूसवी

शीरीं मूसवी चार दशक तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में इतिहास की प्रोफेसर रही हैं। ‘मुगल काल में भारत का आर्थिक इतिहास’ उनका विशेष क्षेत्र है। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘ए स्टैटिस्टिकल स्टडी एंड टैक्सेशन, ट्रेड एंड पीपुल इन मुगल इंडिया’, ‘द इकोनॉमी ऑफ द मुगल एम्पायर 1595-96 : ए स्टैटिस्टिकल स्टडी’; ‘एग्रेरियन पॉवर्टी इन कोलोनियल उत्तर प्रदेश : द डफ़रिन एन्क्वॉयरी, 1887-88’, ‘फ़ेसेट्स ऑफ़ द ग्रेट रेबेलियन, 1857’ उनकी सम्पादित पुस्तकें हैं।

वे कई दशकों तक इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस से जुड़ी रहीं। 2005 से 2019 तक सेन्ट्रल एडवाइज़री बोर्ड ऑफ आर्कियोलॉजी की सदस्य रहीं। वे संयुक्त राज्य अमेरिका में फुलब्राइट फेलो (1983-84), बिलाजिओ सेंटर, मिलान, इटली में रेसिडेन्ट फ़ेलो (1990-91) और कई अन्तर्राष्ट्रीय शैक्षिक संस्थाओं और विश्वविद्यालयों में विज़िटिंग फ़ेलो रही हैं।

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