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Manch Pravesh

Author: Feisal Alkazi
Translator: Amitesh Kumar
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Manch Pravesh

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अलक़ाज़ी और पद्मसी परिवारों की इस कहानी को समकालीन रंगमंच के संक्षिप्त इतिहास की तरह पढ़ा जा सकता है, लेकिन फ़ैसल अलक़ाज़ी इसमें कुछ ऐसे अफ़साने जोड़ते हैं जिन्हें कोई ‘इनसाइडर’ ही जान सकता है। मसलन—उनकी दादी, ‘कुलसुम टेरेस’ की कुलसुमबाई ने 20 वर्ष तक अपने पति से एक लफ़्ज़ भी क्यों नहीं बोला, एलेक और पर्ल पद्मसी की मुलाक़ात कैसे हुई, और फिर क्या हुआ; किस तरह अलक़ाज़ी और निस्सिम इज़ेकियल लंदन के एक फ़्लैट में एक ही बिस्तर साझा करने लगे; और वह नायाब रिश्ता जो इब्राहिम साहब और रोशन अलक़ाज़ी के बीच था और उनके जीवन की ‘दूसरी औरत’ भी।

मुम्बई में शुरू हुए अंग्रेज़ी थिएटर को इब्राहिम अलक़ाज़ी उसे राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय ख्याति तक लेकर गए। इसमें 1950 के दशक में इडिपस रेक्स, मर्डर इन कैथेड्रल और मैकबेथ से लेकर 60 और 70 के दशक में आषाढ़ का एक दिन, अंधा युग और तुग़लक़ जैसे सौ से ज्यादा नाटकों का निर्देशन और अभिनय शामिल था। उनकी जीवन और कर्म-संगिनी, जिनका ताल्लुक़ पद्मसी परिवार से था, उनकी सभी प्रस्तुतियों की मुख्य वेश-भूषा परिकल्पक रहीं।

पचास से ज़्यादा दुर्लभ तस्वीरों से सुसज्जित ‘मंच प्रवेश भारतीय रंगमंच की अनूठी दास्तान है’ जिसे इस तरह से पहले कभी नहीं लिखा गया। रंगप्रेमी इसे सँजो कर रखना चाहेंगे और अच्छी कहानी पसन्द करने वाले पाठक भी। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Amitesh Kumar
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 256p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2
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Feisal Alkazi

Author: Feisal Alkazi

फ़ैसल अलक़ाज़ी

शिक्षाविद्, रंग निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता फ़ैसल अलक़ाज़ी दिल्ली में रहते हैं। पिछले चालीस सालों में उन्होंने अपने समूह ‘रुचिका’ के साथ अपने लिए एक उपयुक्त पनाह तराशा। उन्होंने हिन्दी, अंग्रेज़ी और उर्दू में 200 से अधिक नाटकों का निर्देशन किया है। पूरे भारत में विद्यालयों के लिए उन्होंने 100 से भी ज़्यादा नाटकों और विकलांगों के लिए 30 से अधिक वृत्तचित्रों का निर्देशन किया है।

वर्तमान में वह विरासत शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली, जयपुर, श्रीनगर और हैदराबाद में परियोजनाओं की शुरुआत करने में सक्रिय हैं। वह बीस किताबों के लेखक हैं जिनमें ‘फ़ॉरएवर फ़्रेंड्स’, ‘टैगोर फ़ॉर टुडे’, ‘श्रीनगर : एन आर्किटेक्चरल लेगेसी’ आदि प्रमुख हैं।

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