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Mahua Ka Ped

Author: P. Baidyanath
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Mahua Ka Ped

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‘महुआ का पेड़’ गाँव और शहर के विरोधाभास और उनके बीच आवाजाही करते सीधे-सादे पात्रों की ऐसी कहानियों का संग्रह है जो हमारे समय के यथार्थ को एकदम सरल और सहज भाषा में रेखांकित करती हैं। सरल हृदय लोगों की उदारता और स्वार्थ में अन्धे हुए लोगों की विद्रूपता के कई लोमहर्षक चित्र ये कहानियाँ हमारे सामने उपस्थित करती हैं।

मनुष्यता को लेकर एक अन्तहीन उम्मीद इन कहानियों का वह आधार है जो कहीं कमजोर नहीं पड़ता। राबिया का सरल समर्पण हो या सुकुल बाबू और सुलक्षणा का मानवता के प्रति उदात्त व्यवहार; लेखक की निगाह अपने सूक्ष्म पर्यवेक्षण से जीवन में उन तन्तुओं की तलाश कर ही लेती है, जिनसे मनुष्य समाज प्रेरणा ग्रहण कर सकता है, और हताशा के अँधेरों में भी अपनी राह पा सकता है।

‘झूठी शान’ कहानी के नितेश और चन्दा अपने समाज की रूढ़ियों को ही किस तरह एक आधुनिक मोड़ देते हैं, यह देखने लायक है, इसी तरह जुम्मन द्वारा अपनी बकरी और उसके बच्चों को बचाने का संघर्ष मानव-मन की जटिल प्रकृति के उजले पक्ष को दिखाता है।

इन कहानियों की एक उल्लेखनीय विशेषता इनकी सरल संरचना है जो इन्हें हर पाठक के लिए पठनीय बनाती है। कथाकार ने कहीं भी उपदेश देने का प्रयास नहीं किया, बल्कि जीवन के यथार्थ को एक सुन्दर कथा के रूप में ढालते हुए वे पाठक को सोचने के लिए प्रेरित करते हैं, ताकि वह अपने परिवेश के स्याह-सफ़ेद को स्वयं देख सके।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 104p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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P. Baidyanath

Author: P. Baidyanath

पी. बैद्यनाथ

पी. बैद्यनाथ ने पटना विश्वविद्यालय से स्नातक और सिम्बायोसिस विश्वविद्यालय, पुणे से विशेष योग्यता के साथ रचनात्मक लेखन पूरा किया। ‘टाइम एनरिचमेंट’ उनकी चर्चित पुस्तक है। वे अध्यात्मवाद और प्रेरक यात्रा को समर्पित ब्लॉग ‘अल्टीमेटडॉटकॉम’, हिन्दी भाषा के प्रति जागरुकता को जन-जन तक पहुँचाने के लिए समर्पित ब्लॉग ‘जनगणहिन्दी’ और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए समर्पित संगठन ‘जनगण फाउंडेशन’ के संस्थापक हैं। राजपत्रित अधिकारी की क्षमता में रक्षा मंत्रालय और भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग में दस साल से अधिक की सेवा की। वर्तमान में सहायक निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, बिहार सरकार के पद पर कार्यरत हैं।

ई-मेल : [email protected]

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