महाराज शिवाजी के जीवन पर आधारित मराठी उपन्यास-शृंखला ‘महासम्राट’ की दूसरी कड़ी है—‘घमासान’। ‘झंझावात’ शीर्षक इसकी पहली कड़ी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी और कन्नड़ में भी पाठकों का प्रेम पा चुकी है। शिवाजी के जीवन और उनके सैन्य अभियानों से जुड़े अनेक स्थलों की यात्राओं, अध्येताओं से साक्षात्कारों और अनेक ग्रन्थों के अध्ययन से निकले ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित यह उपन्यास मराठी की शीर्षस्थ रचनाओं में शामिल है।
इस दूसरी कड़ी में अफजल खान के वध से लेकर सिन्धु दुर्ग की नींव पड़ने तक की कहानी कही गई है। इस कथा में नेताजी पालकर नाम के एक पराक्रमी और दुस्साहसी चरित्र से भी हमारा परिचय होता है जो शिवाजी के जीवन में शहाजी राजे और जीजाऊ साहब के बाद अत्यन्त सहयोगी रहे।
यह उपन्यास यह भी बताता है कि शिवाजी महाराज का पराक्रम और उनके अभियान इस्लाम या किसी और धर्म के विरुद्ध नहीं थे। हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना के उनके प्रयासों में दरअसल कई मुस्लिम साथियों ने भी उनका साथ दिया था, जिन्हें इतिहासकारों और शोधकर्ताओं ने अकसर नजरअन्दाज किया।
यह उपन्यास-शृंखला, जिसके पीछे शोध और अध्ययन की एक बहुआयामी प्रक्रिया रही है, सभी तथ्यों का यथावत प्रयोग करती है, यही इसकी इतनी व्यापक स्वीकृति का कारण भी है। पहली कड़ी की तरह, उम्मीद है पाठक इस खंड को भी उतना ही रोचक पाएँगे।
| Language | Hindi |
|---|---|
| Binding | Paper Back |
| Translator | Ravi Buley |
| Editor | Not Selected |
| Publication Year | 2026 |
| Edition Year | 2026, Ed. 1st |
| Pages | 480p |
| Publisher | Rajkamal Prakashan |
| Dimensions | 21.59 X 14 X 3 |