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Kaumudi Aur Anya Natak

Editor: Sourav Roy
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Kaumudi Aur Anya Natak

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नए नाटककारों की पीढ़ी में अभिषेक मजूमदार एक बहुचर्चित हस्ताक्षर हैं। वे मूलतः चरित्रों के नाटककार हैं। उनके नाटकों के पात्र अलग होते हुए भी अपनी अभिज्ञता में परिपूर्ण और तार्किक स्तर पर जागरूक होते हैं। चरित्रों को इस तरह माँजने की  यह क्रिया कथानक में अपेक्षित नाटकीयता और द्वन्द्व पैदा करती है। अभिषेक के नाटकों के विषय और कथानक क्लासिक लेखन की परम्परा से प्रेरित हैं। इनमें एक निर्दिष्ट आरम्भ, मध्य और समापन होता है। बावजूद इसके, उनके नाटकों में जिन्न, भूत, दर्शक, आलोचक, नट जैसे 'बाहरी चरित्र' भी रहस्य न पैदा करते हुए नाटक को देखने-समझने में पाठक की मदद करते हैं।

इस संकलन में शामिल नाटक ‘कौमुदी’ में वे नाटक के भीतर नाटक खेलते हुए गुरु-शिष्य, पिता-पुत्र, और पुराने-नए के बीच के द्वन्द्वों की पड़ताल करते हैं। ‘मुक्तिधाम’ बौद्ध धर्म के उदयकाल की पुनर्रचना करता हुआ हिन्दू उग्रवाद की जड़ों का विनिर्माण करता है। वहीं ‘ईदगाह के जिन्नात’ में अभिषेक कश्मीर की हताशा को भाई-बहन, डॉक्टर-मरीज़, और यथार्थ-फन्तासी के बीच के सम्बन्धों के माध्यम से जाँचते-परखते हैं।

‘कौमुदी’ नाटक को कला और वाणिज्य के रूप में देखने के अलग-अलग आग्रहों, और नाटक और उसके दर्शकों के बीच के द्वन्द्वों का एक ‘मेटा प्ले’ बनकर हमारे समक्ष प्रस्तुत होता है। इसका कारण यह भी है कि नाटक के मुख्य द्वन्द्व का समाधान नाटक के भीतर चल रहे नाटक में होता है, जिसका मैनेजर मूल नाटक का एक महत्त्वपूर्ण पात्र भी है।

‘ईदगाह के जिन्नात’ उनका अत्यन्त चर्चित नाटक है जिसमें तुफ़ैल की मौत और उसके बाद कश्मीर के युवाओं में फैला आक्रोश, दोनों बातों की झलक देखने को मिलती है।

‘मुक्तिधाम’ के ज़रिये नाटककार एक ऐसी विराट राजनीतिक घटना की ओर देखता है जिसकी लम्बी छाया काफ़ी दूर तक भविष्य पर अँधेरा करती है। नाटक का काल और स्थान अतीत में कहीं दबा हुआ है, लेकिन नाटक की घटनाएँ और द्वन्द्व आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। शायद इसी छाया की डोर पकड़कर अभिषेक अतीत में जाकर हिन्दू उग्रवाद की जड़ों का अनुसन्धान करते हैं।

इन नाटकों को पढ़ना भी उतना ही रुचिकर है जितना इन्हें मंच पर घटित होते देखना। 

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Sourav Roy
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 240p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Abhishek Majumdar

Author: Abhishek Majumdar

अभिषेक मजूमदार

अभिषेक मजूमदार सुपरिचित नाटककार, रंग-निर्देशक और निबन्धकार हैं। उन्होंने सिनेमा और ओपेरा में भी काम किया है। वे नालंदा आर्ट्स स्टूडियो, बेंगलुरु के आर्टिस्टिक डायरेक्टर हैं और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, अबू धाबी में थिएटर प्रोग्राम के सचिव हैं और वहीं प्रोफ़ेसर भी हैं। उनके नाटक देश-विदेश के कई मंचों पर मंचित किये गए हैं, और पुरस्कृत हुए हैं। उनके नाटकों का हिन्दी, बांग्ला, कन्नड़, अंग्रेज़ी, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलुगू, कश्मीरी, तिब्बती, स्पैनिश, फ़्रेंच, चेक, यूक्रेनी जैसी देशी-विदेशी भाषाओं में अनुवाद और मंचन हो चुका है।

ई-मेल : [email protected] 

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