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Hindi Ki Avdharna Tatha Anya Nibandh

Author: Raman Sinha
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Hindi Ki Avdharna Tatha Anya Nibandh

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हिन्दी की अवधारणा तथा अन्य निबन्ध रमण सिन्हा के पिछले कुछ वर्षों में लिखे गए निबन्धों का संकलन है। इनमें से अधिकांश आलेख ऐसे हैं जो मूलतः अंग्रेजी में लिखे गए थे, हिन्दी में वे पहली बार इसी पुस्तक में संकलित किये जा रहे हैं।

पुस्तक का मुख्य आलेख ‘हिन्दी की अवधारणा : अतीत, वर्तमान और भविष्य’ है जिसमें उन्होंने जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन के भाषाई सर्वेक्षण (1903-1928) से आरम्भ करते हुए विभिन्न विद्वानों द्वारा प्रस्तुत हिन्दी भाषा विषयक विचारों और समय-समय पर सामने आए विवादों पर दृष्टि डाली है तथा एक भाषा के रूप में हिन्दी आज कहाँ खड़ी है, इस पर विस्तृत विचार किया है। उनका कहना है कि वर्तमान भारत में हिन्दी सत्ता और प्रतिष्ठा की भाषा भले न हो, लेकिन एक प्रसारशील भाषा के रूप में वह निरन्तर विकास कर रही है और जीवन के हर क्षेत्र में अपनी जगह बना रही है।

संकलन में शामिल अन्य निबन्धों में भारतीय साहित्य सिद्धान्त पर केन्द्रित एक सुचिन्तित निबन्ध के अलावा तमिल काव्यशास्त्र के आदिग्रंथ ‘तोलका​प्पियम’ के महत्त्व को रेखांकित करनेवाला विश्लेषणात्मक विवेचन भी इस संग्रह की उपलब्धि है।

‘पंचतंत्र और सर्वेंतिस का श्वान संवाद’, ‘भक्ति और मुस्लिम कवयित्रियाँ’, ‘रामविलास शर्मा का अनुवाद कर्म’, ‘लू शुन और मुक्तिबोध की कहानियाँ’ तथा ‘हिन्दी साहित्य में आधुनिकता’ सहित अन्य कई महत्त्वपूर्ण निबन्ध इस संकलन का हिस्सा हैं जो साहित्य-अध्येताओं, छात्रों और विचारशील पाठकों को उपयोगी लगेंगे।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 248p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Raman Sinha

Author: Raman Sinha

रमण सिन्हा

जन्म : 1960

प्रकाशन : ‘अनुवाद और रचना का उत्तर-जीवन’, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में संगीत-साहित्य और अनुवाद पर लेख एवं कविताएँ प्रकाशित। शमशेर पर एक पुस्तक का लेखन-कार्य।

सम्प्रति : भारतीय भाषा केन्द्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में अध्यापन।

ई-मेल : [email protected]

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