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Harit Nongjabi

Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Harit Nongjabi

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‘हरित नोङ्जाबी’ महाराज कुमारी बिनोदिनी देवी का बहुचर्चित नाटक है जिसकी सिर्फ उनके लेखन में नहीं अपितु आधुनिक मणिपुरी साहित्य में उल्लेखनीय स्थान है।

‘नोङ्जाबी’ शब्द का आशय वर्षा ऋतु में दिखाई देने वाले ताम्रवर्णी आभा से युक्त उन बादलों से है जिन्हें वर्षा ऋतु के विराम ले लेने का संकेत माना जाता है। वस्तुत: नोङ्बाजी का शाब्दिक अर्थ है—वर्षा या बादल का भक्षक जिसका प्रयोग लेखक ने प्रेम को खा जाने वाले समय और समाज को रूपायित करने के लिए किया है।

बिनोदिनी इस नाटक में उस प्रतिगामिता को उजागर करती हैं जो न केवल प्रेम को बल्कि कला को भी हेय सिद्ध करने रीति-नीतियों का समर्थन करती है, और जीवन के प्रति रचनात्मक दृष्टि को हतोत्साहित करती हुई मनुष्य की रचनात्मकता को निरे उत्पादन में जोत देना चाहती है।

इसके अलावा इस संकलन में दो रेडियो नाटक भी संकलित हैं जिनमें मणिपुरी समाज की स्थानीय परिस्थितियों, आकांक्षाओं और सपनों को कुशलतापूर्वक चित्रित किया गया है। हिन्दी में इन्हें प्रस्तुत करते हुए विशेष रूप से यह ध्यान में रखा गया है कि वे शब्द जो मणिपुरी जीवन व भाषा का आस्वाद हम तक पहुँचाते हैं, उन्हें जस-का-तस रखा जाए; और उनके अर्थ दे दिए गए हैं।

सुरुचिपूर्ण ढंग से लिखित और उतनी ही सजगता से अनूदित मणिपुरी साहित्य की ये प्रतिनिधि रचनाएँ हिन्दी पाठकों को महत्त्वपूर्ण लगेंगी, ऐसा हमारा विश्वास है। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Elangbam Vijay Lakshmi
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 120p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Author: Maharaj Kumari Binodini Devi

महाराज कुमारी बिनोदिनी देवी

महाराज कुमारी बिनोदिनी देवी का जन्म 6 फरवरी, 1922 को इम्फाल, मणिपुर में हुआ था। उन्होंने शान्तिनिकेतन से कला की शिक्षा प्राप्त की। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं—‘नुङ्गायरक्ता चंद्रमुखी’ (कहानी-संग्रह), ‘अशङ्बा नोङ्जाबी’ (नाटक-संग्रह), ‘बोरसाहब ओङ्बी सनातोम्बी’ (उपन्यास), ‘ओ मेक्सिको’ (यात्रा-वृत्तान्त), ‘अमसुङ् इन्द्रजीत’, ‘चुड़ाचाँद महाराज गी इमुङ’ (संस्मरण)। उनके लगभग बीस रेडियो नाटक आकाशवाणी, इम्फाल से प्रसारित हुए। उन्होंने फीचर फिल्मों और वृत्तचित्र फिल्मों की पटकथा लिखी जिनमें कई फिल्में राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत हुईं।

उन्हें 1966 में मणिपुरी साहित्य परिषद द्वारा ‘यामिनीसुंदर गुहा स्वर्णपदक’, 1979 में ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से पुरस्कृत और 1976 में ‘पद्मश्री’ से अलंकृत किया गया।

17 जनवरी, 2011 को उनका निधन हुआ।

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