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Ek Bataa Do-Hard Back

Author: Sujata
ISBN: 9789388753678
Edition: 2019, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
Special Price ₹335.75 Regular Price ₹395.00
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9789388753678
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पद्मिनी नायिकाओं-सी अगाधमना लड़कियाँ जब महानगर के गली-कूचों में जन्मे और अपने मायकों की खटर-पटर से निजात पाने के लिए उस पहले रोमियो को ही ‘हाँ’ कर दें जिसने उन्हें देखकर पहली ‘आह’ भरी तो जीवन मिनी-त्रासदियों का मेगा-सिलसिला बन ही जाता है और उससे निबटने के दो ही तरीक़े बच जाते हैं—पहला, ख़ुद को दो हिस्सों में फाड़ना। जैसे सलवार-कुरते का कपड़ा अलग किया जाता है, वैसे शरीर से मन अलग करना। मन को बौद्ध भिक्षुणियों या भक्त कवयित्रियों की राह भेजकर शरीरेण घर-बाहर के सब दायित्व निभाए चले जाना! दूसरे उपाय में भी बाक़ी दोनों घटक यही रहते हैं पर भक्ति का स्थानापन्न प्रेम हो जाता है—प्रकृति से, जीव-मात्र से, संसार के सब परितप्त जनों से और एक हमदर्द पुरुष से भी जो उन्हें ‘आत्मा का सहचर’ होने का आभास देता है।

स्वयं से बाहर निकलकर ख़ुद को द्रष्टा-भाव में देखना और फिर अपने से या अपनों से मीठी चुटकियाँ लिए चलना भी स्त्री-लेखन की वह बड़ी विशेषता है जिसकी कई बानगियाँ गुच्छा-गुच्छा फूली हुई आपको हर क़दम पर इस उपन्यास में दिखाई देंगी! हर कवि के गद्य में एक विशेष चित्रात्मकता, एक विशेष यति-गति होती है, पर यह उपन्यास प्रमाण है इस बात का कि स्त्री-कवि के गद्य में रुक-रुककर मुहल्ले की हर टहनी के फूल लोढ़ते चली जानेवाली क़स्बाई औरतों की चाल का एक विशेष छंद होता है। अब हिन्दी में स्त्री उपन्यासकारों की एक लम्बी और पुष्ट परम्परा बन गई है। सुजाता का यह उपन्यास उसे एक सुखद समृद्धि देता है और ज़रूरी विस्तार भी।

—अनामिका

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2019
Edition Year 2019, Ed. 1st
Pages 135p
Price ₹395.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1
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Sujata

Author: Sujata

सुजाता

हिन्दी के पहले सामुदायिक स्त्रीवादी ब्लॉग ‘चोखेर बाली’ की शुरुआत से लेकर कविता-संकलन ‘अनन्तिम मौन के बीच’, स्त्री-विमर्श की सैद्धान्तिकी पर एक पुस्तक ‘स्त्री-निर्मिति’ अपने उपन्यास ‘एक बटा दो’, और फिर स्त्रीवादी आलोचना को लेकर लगातार लेखन के बाद एक मुकम्मल किताब ‘आलोचना का स्त्रीपक्ष’ तक स्त्रीवाद की अपनी गहरी समझ, सरोकारों और भाषा के अनूठे प्रयोगों से पहचान बनानेवाली सुजाता पिछले एक दशक से दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन कर रही हैं। ‘आलोचना का स्‍त्रीपक्ष’ के लिए उन्‍हें 2022 के देवीशंकर अवस्‍थी सम्‍मान से सम्‍मानित किया गया है। कविता के लिए भी उन्‍हें कई पुरस्‍कार मिल चुके हैं।   

ई-मेल : [email protected]

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