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Dus Dware Ka Pinjra-Hard Cover

Author: Anamika
ISBN: 9788126715312
Edition: 2021, Ed. 4th
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
Special Price ₹505.75 Regular Price ₹595.00
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9788126715312
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सैल्वेशन’ से लेकर ‘लिबरेशन’ तक स्त्री-मुक्ति किन कठिन रास्तों से गुजरी है–इसकी सजग दास्तान है अनामिका की कृति दस द्वारे का पींजरा। पितृसत्ता के वर्चस्व तले निरन्तर क्षयग्रस्त इस दुनिया में स्त्री की मुक्ति खोजना आकाश और धरती के बीच सांस्कृतिक पुल बनाने से कम मुश्किल नहीं है। लेकिन, यह कठिन काम अंजाम दिए बिना दस द्वारे के इस पींजरे में रहनेवाले सुन्दर पंछी खुले गगन में उड़ने के लिए तैयार नहीं हो सकते।

संस्कृति के इसी पुल पर सफर करनेवाले कई ऐतिहासिक पात्रों से यह उपन्यास पाठकों की अविस्मरणीय मुलाकात कराता है। इनमें स्वामी दयानंद, फेनी पावर्स, मैक्सम्युलर, महादेव रानाडे, केशवचंद्र सेन, ज्योतिबा फुले, भिखारी ठाकुर और महेन्द्र मिसिर जैसी इतिहास और लोक-प्रसिद्ध हस्तियाँ शामिल हैं जिनके बिना हमारी आधुनिकता अपनी मौजूदा शक्ल-सूरत हासिल नहीं कर सकती थी। दिलचस्प बात यह है कि इन किरदारों के साथ-साथ इस पुल पर हिन्दू समाज का पतित ब्राह्मणवादी रूढ़िवाद, प्रेम और स्त्री-पुरुष रिश्तों का विमर्श, ब्रिटिश और अमेरिकी आधुनिकता का अन्तर, समाज सुधार का आन्दोलन और रुकमाबाई के मुकदमे जैसे प्रकरण भी अपनी यात्रा कर रहे हैं। सरस कथाक्रम, कल्पनाशीलता, अनूठे शिल्प, विपुल भाषायी वैविध्य, अनुसन्धान और विचार-सम्पदा से रँगे हुए इन पृष्ठों पर भारतीय आधुनिकता के इतिहास की एक कमोबेश अछूती तस्वीर अपनी समस्त जटिलताओं के साथ चित्रित की गई है।

दो परिच्छेदों की इस महागाथा में दो नायिकाएँ हैं : पंडिता रमाबाई और ढेलाबाई। इनकी आत्मीय कथा के जरिए अनामिका ने अपने पात्रों और परिस्थितियों के इर्द-गिर्द भारतीय समाज का एक ऐसा तत्कालीन परिदृश्य बुना है जिसमें आधुनिकता के उन्मोचक प्रभावों से परम्परा का पुनर्संस्कार करने की प्रक्रिया चलती दिखाई देती है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2008
Edition Year 2021, Ed. 4th
Pages 272p
Price ₹595.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 2.5
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Anamika

Author: Anamika

अनामिका

‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से पुरस्कृत कवयित्री अनामिका का जन्म 17 अगस्त, 1961 को मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार में हुआ। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी की प्रोफ़ेसर हैं। उनकी पुरस्कृत और देश-दुनिया की बहुतेरी भाषाओं में अनूदित प्रमुख कृतियाँ हैं—‘बीजाक्षर’, ‘अनुष्टुप’, ‘कविता में औरत’, ‘खुरदुरी हथेलियाँ’, ‘दूब-धान’, ‘टोकरी में दिगन्त’, ‘पानी को सब याद था’, ‘My Typewriter is My Piano’, ‘Vaishali Corridors’ (कविता-संकलन); ‘अवान्तर कथा’, ‘दस द्वारे का पींजरा’, ‘तिनका तिनके पास’, ‘आईनासाज़’ (उपन्यास); ‘स्त्रीत्व का मानचित्र’, ‘स्वाधीनता का स्त्री-पक्ष’, ‘त्रिया चरित्रं : उत्तरकांड’, ‘स्त्री मुक्ति : साझा चूल्हा’, ‘स्त्री-मुक्ति की सामाजिकी : मध्यकाल और नवजागरण’, ‘Feminist Poetics : Where Kingfishers Catch Fire’, ‘Donne Criticism Down the Ages’, ‘Treatment of Love and War in Post-War Women Poets’, ‘Proto-Feminist Hindi-Urdu World (1920-1964)’, ‘Translating Racial Memory’, ‘Hindi Literature Today’ (आलोचना)।

ई-मेल : [email protected]

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