Pani Ko Sab Yaad Tha

Poetry
500%
() Reviews
As low as ₹150.00
ISBN:9789388753616
In stock
SKU
Pani Ko Sab Yaad Tha
- +

अनामिका की ये कविताएँ सगेपन की घनी बातचीत-सी कविताएँ हैं। स्त्रियों का अपना समय इनमें मद्धम लेकिन स्थिर स्वर में अपने दु:ख-दर्द, उम्मीदें बोलता है। इनमें किसी भी तरह का काव्य-चमत्कार पैदा करने का न आग्रह है, न लगता है कि अपने होने का उद्देश्य ये कविताएँ उसे मानती हैं; उनका सीधा-सरल अभिप्राय उन पीड़ाओं को सम्बोधित करना है जो स्त्रियों और उन्हीं जैसी भीतरी-बाहरी यंत्रणाओं से गुज़रे लोगों के जीवन में इस पार से उस पार तक फैली हैं।

बड़ी-बूढ़ी स्त्रियों, दादियों-नानियों, माँओं की बातों, मुहावरों, कहावतों में छिपे काल-सिद्ध सत्य का अन्वेषण अनामिका हमेशा ही करती हैं, सो ये कविताएँ भी लोक और जन-श्रुतियों की अनुभव-वृद्ध नाड़ियों में जीवन-सत्य की, आत्म-सत्य की अनेक धाराओं से अपने मंतव्य को सींचती, पुष्ट करती चलती हैं।

इस संग्रह में विशेष रूप से जो कविता पाठकों का ध्यान खींचनेवाली है वह कुछ साल पहले दिल्ली की एक ठंडी रात में घटित निर्भया-कांड के सन्दर्भ में है। कई उप-खंडों में विभाजित यह कविता विस्थापन बस्तियों में रहनेवाली कई स्त्रियों के जीवन-मन से गुज़रती हुई निर्भया तक पहुँचती है, और अपने ढंग से इस घटना और इसके निहितार्थों की व्याख्या करती है।

स्त्री अनामिका के लिए कोई जाति नहीं है, एक तत्त्व है, जो प्राणि-मात्र के अस्तित्व में मौजूद होता है। वह पुरुष में भी है, पेड़ में भी है, पानी में भी है। वही जीव को जन्म और जीवन देता है, उसे सार्थक करता है। ये कविताएँ उसी तत्त्व को केन्द्र में लाने का उद्यम हैं।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2019
Edition Year 2019, 1st Ed.
Pages 167p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Write Your Own Review
You're reviewing:Pani Ko Sab Yaad Tha
Your Rating

Editorial Review

It is a long established fact that a reader will be distracted by the readable content of a page when looking at its layout. The point of using Lorem Ipsum is that it has a more-or-less normal distribution of letters, as opposed to using 'Content here

Anamika

Author: Anamika

अनामिका

जन्म : 1961 के उत्तरार्द्ध में मुज़फ़्फ़रपुर, बिहार।

शिक्षा : अंग्रेज़ी साहित्य से पीएच.डी.।

दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में अंग्रेज़ी साहित्य की लोकप्रिय प्राध्यापक। अनामिका के सात कविता-संकलन, पाँच उपन्यास, चार शोध-प्रबन्ध, छह निबन्ध-संकलन और पाँच अनुवाद बहुचर्चित हैं। इनके पाठकों का संसार बड़ा है। रूसी, अंग्रेज़ी, स्पेनिश, जापानी, कोरियाई, बांग्ला, पंजाबी, मलयालम, असमिया, तेलुगू आदि में इनकी कृतियों के अनुवाद कई पाठ्यक्रमों का हिस्सा भी हैं। फ़िलहाल आप तीन मूर्ति में फ़ेलो के रूप में सन्नद्ध हैं और यहाँ आपके शोध का विषय है : ‘वीविंग अ नेशन : द प्रोटो-फ़ेमिनिस्ट राइटिंग्ज़ इन उर्दू एंड हिन्दी’।

कृतियाँ : आलोचना—‘पोस्ट एलिएट पोएट्री : अ वॉएज फ्रॉम कांफ्लिक्ट टु आइसोलेशन’, ‘डन क्रिटिसिज़्म डाउन दि एजेज़’, ‘ट्रीटमेंट ऑफ़ लव एंड डेथ इन पोस्ट वार अमेरिकन विमेन पोएट्स’; विमर्श—‘स्त्रीत्व का मानचित्र’, ‘मन माँजने की ज़रूरत’, ‘पानी जो पत्थर पीता है’, ‘स्वाधीनता का स्त्री-पक्ष’; कविता—‘टोकरी में दिगन्‍त : थेरी गाथा : 2014’, ‘पानी को सब याद था’, ‘ग़लत पते की चिट्ठी’, ‘बीजाक्षर’, ‘समय के शहर में’, ‘अनुष्टुप’, ‘कविता में औरत’, ‘खुरदुरी हथेलियाँ’, ‘दूब-धान’; कहानी—‘प्रतिनायक’; संस्मरण—‘एक ठो शहर था’, ‘एक थे शेक्सपियर’, ‘एक थे चार्ल्स डिकेंस’; उपन्यास—‘आईनासाज़’, ‘अवान्तर कथा’, ‘दस द्वारे का पींजरा’; अनुवाद—‘नागमंडल’ (गिरीश कार्नाड), ‘रिल्के की कविताएँ’, ‘एफ्रो-इंग्लिश पोएम्स’, ‘अटलान्त के आर-पार’ (समकालीन अंग्रेज़ी कविता), ‘कहती हैं औरतें’ (विश्व साहित्य की स्त्रीवादी कविताएँ)।

सम्मान : ‘राजभाषा परिषद पुरस्कार’ (1987), ‘भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार’ (1995), ‘साहित्यकार सम्मान’ (1997), ‘गिरिजाकुमार माथुर सम्मान’ (1998), ‘परम्परा सम्मान’ (2001), ‘साहित्य सेतु सम्मान’ (2004) आदि।



Read More
Books by this Author

Back to Top