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Dhunon Ki Yatra : Hindi Filmon Ke Aarambhik Sangeetkar : 1931-2005

Author: Pankaj Rag
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
As low as ₹315.00 Regular Price ₹350.00
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Dhunon Ki Yatra

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धुनों की यात्रा हिन्दी फ़िल्म-संगीतकारों पर केन्द्रित ऐसी पहली मुकम्मल और प्रामाणिक पुस्तक है, जिसमें संगीतकारों के विवरण और उनकी संगीत-रचनाओं के विश्लेषण के साथ उनकी सृजनात्मकता को भारतीय  समाज और जनाकांक्षाओं की प्रवृत्तियों के सन्दर्भ में रेखांकित किया गया है।

धुनों की इस यात्रा में मात्र संगीत की सांख्यिकी को ही नहीं देखा गया है, बल्कि संगीत-रचनाओं की जैविक और भौतिक अनुभूतियों को राग, ताल, प्रभाव, सांगीतिक बारीकी और सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक परिवेश के सन्दर्भ में विवेचित भी किया गया है। समाज के पुराने एवं नए, ढहते और बनते रूपाकारों, मूल्य-संरचनाओं, उल्लास, आवेश-आवेग, संघर्षों और संयोजनों की अक्कासी फिल्मी गीतों में कैसे होती है, यह भी इस सूक्ष्म विवेचना का हिस्सा है।

फिल्म संगीत के बारे में आम धारणा और प्रारम्भिक आकर्षण रोमान का ही होता है। ‘धुनों की यात्रा’ इस मिथकीय भ्रम को तोड़ती है। स्वातंत्र्य चेतना के प्रादुर्भाव, स्वतंत्रता आन्दोलन, रूढ़ सामाजिक विसंगतियों के प्रति अलगाव, बहुलता और बहुमत के प्रति लगाव, जनाकांक्षा की तीव्र अभिव्यक्ति, धर्म और बाज़ार के पाखंड, युवा और युवतर चेतना की सशक्त वैश्विक दृष्टि, उनकी शैलियों और उनके समय की पड़ताल के सन्दर्भ में यह पुस्तक फिल्म-संगीत पर सर्वथा नए दृष्टि-पथ का निर्माण करती है।

संगीत के सन्दर्भों के साथ बदलती प्रवृत्तियों की यह यात्रा आम पाठकों और संगीत रसिकों के लिए तो उपयोगी है ही; भारतीय फ़िल्म संगीत के इतिहास, सांगीतिक धुनों की छवि और छाप, शैलियों की विविधता, विशिष्टता, राग और तालों के विवरण-विस्तार और फ़िल्म संगीत के क्रमिक विकास के सन्दर्भों के चलते एक सन्दर्भ-पुस्तक के रूप में यह अध्येताओं-शोधकर्ताओं के लिए भी उपयोगी होगी।

‘धुनों की यात्रा’ के इस पहले भाग में पिछली सदी के तीस और चालीस के दशक के लगभग सभी संगीतकार शामिल हैं, न सिर्फ वे जिन्हें हम सभी जानते हैं, बल्कि वे भी जिनके नामों से ज्यादातर लोग अनजान हैं।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2006
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 200p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Pankaj Rag

Author: Pankaj Rag

पंकज राग

मुज़फ़्फ़रपुर (बिहार) में जन्मे पंकज राग ने सेंट स्टीफ़ंस कॉलेज, दिल्ली से इतिहास विषय में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। तत्पश्चात् उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से आधुनिक भारतीय इतिहास में एम.फ़िल. की उपाधि प्राप्त की तथा दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग डेढ़ वर्ष तक अध्यापन किया। 1990 में वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (मध्य प्रदेश संवर्ग) में आए।

पंकज राग ने पुरातत्त्वविज्ञान, अभिलेखागार एवं संग्रहालय आयुक्त, मध्य प्रदेश सरकार के रूप में भी अपनी सेवा प्रदान की है। उन्होंने निदेशक, भारतीय फ़िल्म एवं टेलीविज़न संस्थान, पुणे तथा मध्य प्रदेश सरकार में अन्य महत्त्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया है।

एक संगीत विशेषज्ञ के रूप में पंकज राग ने फ़िल्मों और संस्कृति पर गहन शोध किया है और सन् 1931 से 2005 तक के फ़िल्म संगीत निर्देशकों पर आधारित उनकी पुस्तक ‘धुनों की यात्रा’ बहुचर्चित रही है। वे प्रख्यात हिन्दी कवि हैं। उनके कविता-संग्रह ‘यह भूमंडल की रात है’ पर उन्हें प्रतिष्ठित ‘केदार सम्मान’, ‘मीरा स्मृति सम्मान’ और ‘स्पन्दन कृति सम्मान’ प्राप्त हुआ है। रूपा एंड कम्पनी से प्रकाशित अपनी कृति ‘1857 : दी ओरल ट्रैडिशन’ में उन्होंने लोकगीतों एवं लोककथाओं के माध्यम से प्रथम स्वतंत्रता-संग्राम को पुनर्सृजित किया है।

उनकी अन्य कृतियाँ हैं—‘विन्टेज मध्य प्रदेश, भोपाल 50 इयर्स’, ‘मास्टर पीसेज ऑफ़ मध्य प्रदेश’, ‘राग-रागिनी फोलियो’, ‘रायसेन का पुरातत्त्व’, ‘राजगढ़ का पुरातत्त्व’, ‘मंदसौर का पुरातत्त्व’, ‘नोन एंड अननोन : एन इंसाइक्लोपीडिया ऑफ़ मॉन्यूमेंट्स ऑफ़ मध्य प्रदेश’ आदि।

फिलहाल वे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं महानिदेशक, राष्ट्रीय अभिलेखागार के पद पर कार्यरत हैं।

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