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Devtulya Nastik-Hard Cover

Author: Arun Bholey
ISBN: 9788126725991
Edition: 2014, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
Special Price ₹297.50 Regular Price ₹350.00
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9788126725991
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धर्म, दर्शन और विज्ञान अपने-अपने तरीक़े से सत्य और ज्ञान की खोज करते रहते हैं। स्थूल रूप से इनकी चेष्टाएँ विरोधी प्रतीत हो सकती हैं, लेकिन गहरे मन्तव्यों में लक्ष्य एक ही है। आस्तिक और नास्तिक केवल व्यावहारिक विभाजन हैं—प्रक्रिया की भिन्नता के कारण।

‘देवतुल्य नास्तिक’ पुस्तक में अरुण भोले कुछ विशिष्ट व्यक्तित्वों के माध्यम से जीवन के रहस्यों को जानने का प्रयास करते हैं। ‘ज्ञानपिपासु गौतम’, ‘अन्तर्मुखी विज्ञान’, ‘तटस्थ प्रकृति’, ‘वैज्ञानिक ज्ञान-मीमांसा’, ‘सन्देह और श्रद्धा के संगम’, ‘संवाद और सहयोग', 'जले दीप से दीप' तथा 'विज्ञान और नियति' शीर्षकों के अन्तर्गत लेखक ने सत्य और ज्ञान की खोज करनेवाले विश्वविख्यात व्यक्तित्वों का विश्लेषण किया है।

लेखक का उद्देश्य स्पष्ट है। वह चाहता है कि शक्तियों में समन्वय हो।

लेखक के शब्दों में : ‘अपने अन्वेषण और प्रयोगों से विज्ञान ने जो तथ्य बटोरे हैं, उन सबके आत्यन्तिक अर्थ क्या हैं तथा लोकमंगल की दृष्टि से उनका परम उपयोग क्या होगा, इसी का बोध ज्ञान माना जाएगा। वैसे ज्ञान के अभाव में अमर्यादित वैज्ञानिक जानकारियाँ हमें सर्वनाश की ओर ले जा सकती हैं। यही वह स्थल है जहाँ हमें धर्म और दर्शन की सहायता लेनी पड़ेगी; क्योंकि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि जीवन को सँवारने और मानवीय भावनाओं को प्रभावित करने का अधिक अभ्यास और अनुभव दर्शन और धर्म को ही है।’

विश्व संस्कृति की अन्तर्धाराओं का प्रवाहपूर्ण, प्रामाणिक और सतर्क विश्लेषण।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2014
Edition Year 2014, Ed. 1st
Pages 191p
Price ₹350.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Arun Bholey

Author: Arun Bholey

अरुण भोले

अरुण भोले का जन्म 15 नवम्बर, 1933 को मिश्रटोला, दरभंगा, बिहार में हुआ। वे केसरिया थाना, पूर्वी चम्पारण के मूल निवासी हैं। किशोरावस्था से ही स्वराज और समाजवादी आन्दोलन से जुड़े रहे। सत्तर के दशक में बिहार राज्य सोशलिस्ट पार्टी के मंत्री तथा जे.पी. आन्दोलन के प्रमुख सहभागी रहे। अध्यापन और पत्रकारिता के पश्चात बरसों पटना उच्च न्यायालय के सफल अधिवक्ता के रूप में सक्रिय रहे। उनकी प्रमुख पुस्तकें है—‘धर्मों की कतार में इस्लाम’, ‘देवतुल्य नास्तिक’, ‘राजनीति मेरी प्रेयसी’। फिलहाल अहमदाबाद, गुजरात में रहते हैं।

ई-मेल : [email protected]

 

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