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Cinema Ke Mudde : Muddon Ka Cinema

Author: Shivani Rakesh
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Cinema Ke Mudde : Muddon Ka Cinema

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सिनेमा विधा की जानकारी मुझे बहुत कम है लेकिन केवल इस किताब को पढ़ने से मैं कह सकता हूँ कि मैंने न केवल भारतीय सिनेमा, बल्कि प्रकारान्तर से विश्व सिनेमा की भी अत्यन्त मूल्यवान जानकारी हासिल कर ली। <br><br>

इस किताब को विषयवार भी वर्गीकृत किया गया है और कालक्रमवार भी। मेरा अनुमान है कि प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हज़ार फ़िल्मों का उल्लेख या सन्दर्भ तो मिल ही जाता है जिनमें हिन्दी सिनेमा किस प्रकार क्रमश: आमजन के मुद्दों से भटककर अभिजन वर्ग का हित करने का साधन बन गया, किस प्रकार जातिवाद को पोषित करने और उच्च जाति का गौरवगान करने का माध्यम बन गया, इसे सोदाहरण और विस्तार से बताया गया है। इसके साथ ही किताब में किसानों के, मजदूरों के, वेश्याओं के, दृष्टिबाधितों के, खिलाड़ियों के, डाकुओं, पत्रकारों और भूमाफ़िया के मुद्दों को विषय बनाकर बनाई गई फ़िल्मों का भी विशद विश्लेषण किया गया है। इस पुस्तक के लिए सामग्री का चयन करने और उसको संयोजित करने में जो अथक परिश्रम किया गया है वह अत्यन्त प्रशंसनीय है। हिन्दी में सिनेमा पर इतनी समृद्ध किताब मैंने दूसरी नहीं पढ़ी। इसकी भाषा इतनी सरल और सुगम है कि सामान्य पाठक और सिनेमा के शोधार्थियों—दोनों के लिए यह अत्यन्त उपयोगी है।

—शिवमूर्ति

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 328p
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2
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Shivani Rakesh

Author: Shivani Rakesh

शिवानी राकेश

शिवानी राकेश का जन्म 6 नवम्बर, 1987 में बुन्देलखंड के जालौन जिले के कोंच कस्बे में हुआ। प्राथमिक से लेकर इंटरमीडिएट तक की उनकी शिक्षा उरई में हुई। उच्च शिक्षा के लिए वे लखनऊ गईं। ‘एमिटी यूनिवर्सिटी’ से 2006 में उन्होंने ‘बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स’ की डिग्री ली। फिर नोएडा स्थित एक मल्टी नेशनल कम्पनी ‘मैजिक सॉफ्टवेयर’ में ई-बुक प्रोडक्शन और एनीमेशन डिविजन में काम किया। तीन सालों तक नौकरी करने के बाद पुनः लखनऊ लौटीं और लखनऊ विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन विभाग से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया।

चित्रकारी, एनिमेशन और सिनेमा में उनकी गहरी दिलचस्पी है। सिनेमा देखने और उससे जुड़ी किताबें पढ़ने के शौक ने उन्हें फ़िल्मों पर लिखने को प्रेरित किया। ‘सिनेमा को पढ़ते हुए’ शीर्षक से उनकी एक किताब प्रकाशित है। ‘सिनेमा के मुद्दे : मुद्दों का सिनेमा’ उनकी दूसरी किताब है।

ई-मेल : [email protected]

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