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Bhukhmaroo

Author: Bama
Translator: Savita Pathak
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Bhukhmaroo

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दो जून की रोटी के लिए जिन्हें रोज़ जूझना पड़ता है; उनके लिए अपने भीतर की ताक़त ही सब कुछ है। तमिल भाषा की दलित स्त्री कथाकारों की ये कहानियाँ उन लोगों की ताक़त को स्वर देने की कोशिश करती हैं, उसे और मज़बूत करने की भी।

भूख और ग़रीबी के अलावा जातिगत भेदभाव, श्रम का शोषण और प्रकृति के दोहन से उपजी समस्याएँ भी हैं जिनकी सबसे ज़्यादा मार इन्हीं लोगों पर पड़ती है। लेकिन जैसाकि इस संकलन में शामिल उमा देवी की कहानी ‘कमला’ रेखांकित करती है, संघर्ष और बदलाव की शुरुआत भी यही लोग करते हैं।

‘भुखमारू’ संग्रह में शामिल प्रत्येक कहानी एक अलग परिवेश और जीवन के एक अलग पहलू को पाठक के सामने लाती है। बिना किसी फ़ॉर्मूले का अनुकरण किए इन कहानियों में हमें बेहद सजीव पात्र और बहुत नज़दीक से देखे गए विवरण मिलते हैं। इनका प्राकृतिक और सामाजिक परिवेश कथा-पात्रों को भी एक भिन्न आयाम देता है जिससे वे ज़्यादा मौलिक और वास्तविक दिखने लगते हैं। विसंगतियों, उत्पीड़न और अन्याय पर टिके मनुष्य समाज के बरक्स पशु-पक्षियों और जंगल की मौजूदगी इन कहानियों को और विशिष्ट बनाती है।

इन कहानियों का चयन और संकलन तमिल भाषा की सुप्रसिद्ध कथाकार बामा ने किया है जिनकी रचनाओं ने देश से बाहर भी अपनी पहचान बनाई है।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Savita Pathak
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 168p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 19 X 13 X 1
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Author: Bama

बामा

विख्यात तमिल कथाकार बामा का जन्म 14 मार्च, 1958 को हुआ। नारीवाद और जाति-विरोध उनके साहित्य में विशेष रूप से मुखर है। दलित सौन्दर्यशास्त्र की निर्मिति में उनकी कृतियों का विशेष योगदान रहा है। उनका आत्मकथात्मक उपन्यास ‘करुक्कु’ अत्यन्त चर्चित रहा। उनकी अन्य प्रकाशित कृतियों में ‘संगति’ (1994), ‘किसुम्बुकरन’ (1996), ‘वनम’ (2002), ‘ओरु थाथ अवुम येरुमायुम’ (2003), ‘कोंडट्टम’ (2009), ‘मानुषी’ (2012), थवित्तुकुरुवी (2015) और ‘विरुत्चांगलागम विथाइगल’ (2022) शामिल हैं। उनकी रचनाएँ हिन्दी, तेलुगु, कन्नड़, गुजराती, मलयालम, अंग्रेजी, फ्रेंच आदि कई भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं। ‘करुक्कु’ उपन्यास के लिए उन्हें वर्ष 2000 में ‘क्रॉसवर्ड पुरस्कार’ से पुरस्कृत किया गया। 

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