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Bharat : Ek Vichar-Parampara

Author: Prem Kumar Mani
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Bharat : Ek Vichar-Parampara

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भारत क्या है—आज इस सवाल को पूछना, इसके उत्तर तलाश करना और एक राष्ट्र के रूप में भारत की संरचना को समझना बहुत ज़रूरी हो गया है। समय है कि अकादमिक बहसों-विमर्शों से आगे बढ़कर इस सवाल पर आम जन की आम भाषा में बात हो।

‘भारत : एक विचार-परम्परा’ इसी दिशा में एक बड़ा क़दम है। इसका उद्देश्य भारतखंड की हज़ारों वर्षों की सामाजिक-सांस्कृतिक यात्रा पर दृष्टिपात करते हुए यह जानना है कि वह क्या चीज़ है कि ‘हस्ती मिटती नहीं हमारी’? वह क्या तत्व है जो आरम्भ से अब तक इस इतने लम्बे सफ़र की प्रेरणा-पूँजी रहा है।

सिन्धु नदी के किनारे उगी-उभरी सभ्यता कैसे आगे बढ़ी; वेदों का, उपनिषदों का समय आया, हड़प्पा और मुअन-जो-दड़ो विकसित हुए, तक्षशिला जैसे ज्ञान के महान केन्द्र अस्तित्व में आए, मगध में विचारों और विचारकों का इतना जमावड़ा हुआ; बौद्ध दर्शन, जहाँ उद्भूत हुआ, मध्यकाल में जिसने विदेशी आक्रान्ताओं का सामना किया, ब्रिटिश शासन का लम्बा औपनिवेशिक दौर देखा, और लम्बे संघर्ष के उपरान्त विभाजन जैसी विभीषिका के साथ स्वतंत्रता प्राप्त की।

लेकिन एक विचार के रूप में भारत भारत ही बना रहा; समय से सीखता ख़ुद को बदलता, आगे बढ़ता। यह पुस्तक इस पूरी यात्रा पर दृष्टिपात करती है और हमें अपनी सुदीर्घ वैचारिक परम्परा के मद्देनज़र एक मत स्थिर करने में मदद करती है। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 640p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 4
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Author: Prem Kumar Mani

प्रेम कुमार मणि

जन्म : 25 जुलाई, 1953 को बिहार के एक स्वतंत्रता सेनानी परिवार में।

शिक्षा : विज्ञान में स्नातक हैं। नालन्दा में भिक्षु जगदीश काश्यप के सान्निध्य में रहकर बौद्ध धर्म दर्शन का अध्ययन भी किया।

प्रकाशन : 1971 में ‘मनुस्मृति’ पर एक आलोचनात्मक पुस्तिका से लेखन की शुरुआत हुई। अब तक कई कहानी-संकलन, उपन्यास और लेखों के संकलन प्रकाशित।

कहानियाँ अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में अनूदित।

सम्मान : कहानी-संग्रह ‘अँधेरे में अकेले’ के लिए ‘श्रीकान्त वर्मा स्मृति पुरस्कार’ (1993), साहित्यिक सेवा के लिए बिहार सरकार से राष्ट्रभाषा परिषद का ‘विशेष साहित्य सेवा सम्मान’, ‘विवेकानन्द पुरस्कार’ सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित।

मणि जी बिहार विधान परिषद् के सदस्य भी रहे। फ़िलहाल पटना में रहकर स्‍वतंत्र लेखन।

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