Apaar Khushi Ka Gharana

Author: Arundhati Roy
Translator: Mangalesh Dabral
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Apaar Khushi Ka Gharana
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'अपार ख़ुशी का घराना' हमें कई वर्षों की यात्रा पर ले जाता है। यह एक कहानी है जो पुरानी दिल्ली की तंग बस्तियों से खुलती हुई फलते-फूलते नए महानगर और उससे दूर कश्मीर की वादियों और मध्य भारत के जंगलों तक जा पहुँचती है, जहाँ युद्ध ही शान्ति है और शान्ति ही युद्ध है और जहाँ बीच-बीच में हालात सामान्य होने का एलान होता रहता है।

अंजुम, जो पहले आफ़ताब थी, शहर के एक क़ब्रिस्तान में अपना तार-तार कालीन बिछाती है और उसे अपना घर कहती है। एक आधी रात को फुटपाथ पर कूड़े के हिंडोले में अचानक एक बच्ची प्रकट होती है। रहस्यमय एस. तिलोत्तमा उससे प्रेम करनेवाले तीन पुरुषों के जीवन में जितनी उपस्थित है उतनी ही अनुपस्थित रहती है। 

'अपार ख़ुशी का घराना' एक साथ दुखती हुई प्रेम-कथा और असंदिग्ध प्रतिरोध की अभिव्यक्ति है। उसे फुसफुसाहटों में, चीख़ों में, आँसुओं के ज़रिये और कभी-कभी हँसी-मज़ाक़ के साथ कहा गया है। उसके नायक वे लोग हैं जिन्हें उस दुनिया ने तोड़ डाला है जिसमें वे रहते हैं और फिर प्रेम और उम्मीद के बल पर बचे हुए रहते हैं। इसी वजह से वे जितने इस्पाती हैं उतने ही भंगुर भी, और वे कभी आत्म-समर्पण नहीं करते। यह सम्मोहक, शानदार किताब एक नए अन्दाज़ में फिर से बताती है कि एक उपन्यास क्या कर सकता है और क्या हो सकता है। अरुंधति रॉय की कहानी-कला का करिश्मा इसके हर पन्ने पर दर्ज है।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back, Paper Back
Publication Year 2019
Edition Year 2019, Ed. 1st
Pages 430p
Translator Mangalesh Dabral
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14.5 X 2
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Arundhati Roy

Author: Arundhati Roy

अरुन्धति रॉय

अरुंधति रॉय ने वास्तुकला का अध्ययन किया है। आप 'द गॉड ऑफ़ स्माल थिंग्स’ जिसके लिए आपको 1997 का ‘बुकर पुरस्कार’ प्राप्त हुआ और 'द मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ की लेखिका हैं। दुनिया-भर में इन दोनों उपन्यासों का अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। आपकी पुस्तकें ‘मामूली चीज़ों का देवता’, 'अपार ख़ुशी का घराना’, 'बेपनाह शादमानी की ममलिकत’ (उर्दू में), 'न्याय का गणित’, 'आहत देश’, 'भूमकाल’, 'कॉमरेडों के साथ’, 'कठघरे में लोकतंत्र’ राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुई हैं। 'माय सीडिशियस हार्ट’ आपकी समग्र कथेतर रचनाओं का संकलन है। आप 2002 के ‘लनन कल्चरल फ़्रीडम पुरस्कार’, 2015 के ‘आंबेडकर सुदर पुरस्कार’ और ‘महात्मा जोतिबा फुले पुरस्कार’ से सम्मानित हैं।

 

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