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Andhere Mein Buddha-Paper Back

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9789360861049
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उनींद, अवसाद, शोक, स्मृतियाँ, आत्मा के ख़ाली पात्र को भरता एकान्त और उसे वापस सोख लेता अकेलापन, मृत्यु, बिछोह और दुख, ‘अँधेरे में बुद्ध’ की कविताएँ ऐसे ही तत्वों से बनी हैं। ये कविताएँ जितनी अपने बारे में हैं उतनी ही दूसरों के बारे में, और उन चीज़ों के बारे में जो सबकी हैं, जैसे सपने, जैसे हताशाएँ, जैसे पीड़ा।

ये कविताएँ अपने आधे सिर के दर्द के साथ कभी ईश्वर से संवाद करती हैं, कभी अपनी देह से, कभी-कभी उन लोगों से भी जो चले गए, लेकिन जो हमारी देह की किसी टीसती नस में अभी भी जीवित बहते हैं।

ये कविताएँ उन ततैयों के बारे में भी हैं जो जीवन की दीप्ति में प्रकाशमान हमारे माथों के भीतर चुपचाप बैठे रहते हैं, और व्यर्थताबोध की किसी तीखी कौंध में अचानक भन्नाने लगते हैं, और बेशक उनके बारे में भी जो चुप बैठते ही नहीं, रात-दिन भन्नाते ही रहते हैं—हर साँस पर और तेज़।

दुख के खोटे सिक्के को बचाने को व्याकुल इन कविताओं में प्रेम का दुख भी है, आत्मा और देह के दुख भी हैं, इतिहास के दुख भी हैं, जीवन की दैनिंदिनी की मशीन से झरते दुख भी हैं...और वह दुख भी है जो बस इसीलिए होता है, क्योंकि हम होते हैं, जिसे बुद्ध ने देखा। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2024
Edition Year 2024, Ed. 1st
Pages 158p
Price ₹299.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21 X 13.5 X 1.5
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Gagan Gill

Author: Gagan Gill

गगन गिल

गगन गिल हिन्दी कविता-साहित्य का एक अनिवार्य नाम हैं। उनका जन्म 1959 में नई दिल्ली में हुआ था। 1983 में ‘एक दिन लौटेगी लड़की’ कविता-शृंखला के प्रकाशित होते ही उनकी कविताओं ने सबका ध्यान आकर्षित किया। तब से उनकी रचनाशीलता साहित्य के अध्येताओं, पाठकों और आलोचकों के विमर्श का हिस्सा रही है। अब तक पाँच कविता-संग्रह और चार गद्य कृतियाँ प्रकाशित। पत्रकारिता से भी नाता रहा। एशिया, यूरोप और अमेरिका के अनेक देशों की साहित्यिक यात्राएँ कर चुकी हैं। ‘भारतभूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार’ (1984), ‘संस्कृति सम्मान’ (1989), ‘केदार सम्मान’ (2000), ‘हिन्दी अकादमी साहित्यकार सम्मान’ (2008) और ‘द्विजदेव सम्मान’ (2010) से सम्मानित।

ई-मेल : [email protected]

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