Aap Biti-Jag Biti

Autobiography
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Aap Biti-Jag Biti
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वास्तव में यात्रा करना और दृष्टि के साथ यात्रा करना, दो भिन्न बातें हैं। हम सभी यात्रा करते हैं, लेकिन कितने ऐसे होते हैं जो हमें सृजनात्मक अभिव्यक्ति का रूप देते हैं या सोद्देश्यपूर्ण बना पाते हैं। जब यात्रा-वृत्तान्त या सफ़रनामा सृजनात्मकता का स्पर्श करता है, तब यह यात्रा साहित्य के जगत में प्रवेश करने लगता है। संक्षेप में, यात्रा-वृत्तान्त परिचित या अपरिचित समाज व क्षेत्र को स्व-अवलोकन के माध्यम से जानने-समझने की एक सृजनात्मक प्रक्रिया है और जिज्ञासा इसकी कुतुबनुमा होती है। युवा जिज्ञासु संदीप भूतोड़िया ने अपनी पहली यात्रा-कथा ‘आपबीती-जगबीती’ में एक सजग व संवेदनशील यात्रा लेखक का परिचय देकर मुझे निःसन्देह चौंकाया है। क़रीब सात-आठ वर्ष पहले कोलकाता में स्व. डॉ. प्रभा खेतान के निवास पर संदीप से संक्षिप्त भेंट हुई थी। उस समय इतना ही बतलाया गया था कि संदीप की रुचि व्यापार में कम है और सामाजिक कार्यों में इनकी सक्रियता रहती है। विभिन्न अन्तरालों से हुई मुलाक़ातों से यह भी पता चला कि संदीप संयुक्त राष्ट्र से सम्बन्धित संस्थाओं से भी सम्बद्ध हैं और अपने कार्य के सिलसिले में देश-विदेश की यात्राएँ अक्सर करते रहते हैं। विभिन्न समाजों और जीवन-शैलियों का क़रीब से अवलोकन करना भी संदीप भूलते नहीं हैं। इस अवलोकन का ही परिणाम है प्रस्तुत पुस्तक। —रामशरण जोशी

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2010
Edition Year 2010, Ed. 1st
Pages 224p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Editorial Review

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Sandeep Bhutoria

Author: Sandeep Bhutoria

संदीप भूतोड़िया

राजस्‍थान के चुरू में जन्‍मे संदीप भूतोड़िया देश-विदेश में भारतीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देनेवाले एक मिशन वाले व्यक्ति हैं। वे सांस्कृतिक, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक तो हैं ही, ‘वर्ल्ड फ़ेडरेशन ऑफ़ यूनाइटेड नेशंस एसोसिएशन’ की वित्त समिति के कोषाध्यक्ष भी हैं। बहुत कम समय में उन्होंने राष्‍ट्रीय-अन्‍तरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर पहचान हासिल की है। उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध पुस्‍तक है—‘आपबीती-जगबीती’।

वेबसाइट : www.sundeepbhutoria.blogspot.com

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