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Uske Hisse Ka Jadoo-Hard Cover

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प्रियदर्शन की कहानियों में रिश्तों का एक अनवरत खेल दिखाई पड़ता है—अनजाने लोग एक-दूसरे के क़रीब आ जाते हैं, अकेले लोग एक-दूसरे का सहारा बन जाते हैं। लेकिन ये कहानियाँ सदाशयी मनुष्यता की नीतिकथाएँ नहीं हैं, इनमें हमारे जटिल समय के घात-प्रतिघात से बन रही अनेकरैखिक विडम्बनाएँ दिखाई पड़ती हैं जिनमें इनसान कुछ खो रहा है, कुछ खोज रहा है। इन कहानियों में कहीं अपनी खो चुकी माँ को खोजती बेटी है, कहीं अपने बेटे को पहचानने की कोशिश करता एक पिता है। कहीं प्रेम है जो अनकहा रह जाता है तो कहीं टूटन है जो अनपहचानी रह जाती है। कहीं कोई पुरानी कसक सिर उठाती है तो कहीं कोई नई पीड़ा रास्ता खोजती है। कहीं आत्मीयता हाथ पकड़ती है तो कहीं अजनबीयत सहारा बनती है। लेकिन ये कुछ चरित्रों के निजी अवसाद या प्रेम या उनकी टूटन की कहानियाँ नहीं हैं, इनमें हमारा वह समय और समाज भी पढ़ा जा सकता है जो हाल के वर्षों में इतनी तेज़ी से बदला है कि उससे तुक-ताल बिठाने की कोशिश में हमारी चूलें उखड़ती लग रही हैं। इन कहानियों में वे राजनीतिक विद्रूप भी दिखते हैं जिन्होंने हमारे समाज को ज़ख़्मी किया है और वह इनसानी हक़ीक़त भी जो ऐसे ज़ख़्मों के लिए मलहम का काम करती है।

भाषा इन कहानियों की जान है—बेहद पारदर्शी और तरल, चरित्रों की गहन पड़ताल के बीच बनती हुई। यह एक आधुनिक भाषा है जिसमें बोलचाल की सहजता भी है और लालित्य का संस्कार भी। अपनी सीमाओं की पहचान भी और इन सीमाओं के पार जाने की शक्ति भी। दरअसल जीवन की बेहद मामूली और आम तौर पर अनदेखी रह जानेवाली घटनाओं के बीच बनती ये कहानियाँ पाठक को सिर्फ़ बाँधती ही नहीं, अपने साथ जोड़ती भी हैं—यह अनायास नहीं है कि वह इन कहानियों में अपनी कहानी खोजने लगता है।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2007
Edition Year 2007, Ed. 1st
Pages 138p
Price ₹250.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22 X 14 X 1.5
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Priyadarshan

Author: Priyadarshan

प्रियदर्शन

प्रियदर्शन का जन्म 24 जून, 1968 को राँची में हुआ। उन्होंने राँची विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में एम.ए. की पढ़ाई करने के बाद उसी शहर से पत्रकारिता की शुरुआत की।

उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘ज़िन्दगी लाइव’ (उपन्यास); ‘बारिश, धुआँ और दोस्त’, ‘उसके हिस्से का जादू’, ‘हत्यारा और अन्य कहानियाँ’, ‘सहेलियाँ और अन्य कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘यह जो काया की माया है’, ‘नष्ट कुछ भी नहीं होता’, ‘चयनित कविताएँ’ (कविता-संग्रह); ‘ग्लोबल समय में गद्य’, ‘ग्लोबल समय में कविता’ (आलोचना); ‘इतिहास गढ़ता समय’, ‘भारत की घड़ी’, ‘समाज, संस्कृति और संकट’, ‘जो हिंदुस्तान हम बना रहे हैं’, ‘हमारी भाषा हमारा देश’ (विचार); ‘दुनिया मेरे आगे’, ‘क्या ये शहर तुम्हारा है? (संस्मरण); ‘नए दौर का नया सिनेमा’ (फिल्म); ‘ख़बर-बेख़बर’ (पत्रकारिता); ‘आपकी जेलें टूट जाएँगी एक दिन’ (ट्विटर ग़ज़लें); ‘बेटियाँ मन्नू की’ (नाटक)।

उनका कविता-संग्रह ‘नष्ट कुछ भी नहीं होता’ मराठी में और उपन्यास ‘ज़िन्दगी लाइव’ अंग्रेज़ी में अनूदित हैं। उन्होंने सलमान रुश्दी और अरुंधति‍ रॉय की कृतियों सहित कई किताबों का अनुवाद और सम्पादन भी किया है। विविध राजनैतिक-सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर तीन दशक से नियमित विविधतापूर्ण लेखन और हिन्दी की सभी महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन।

उन्हें कहानी के लिए पहला ‘स्पन्दन सम्मान’ और टीवी पत्रकारिता के लिए हिन्दी अकादमी, दिल्ली के सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

ई-मेल : [email protected]

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