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Thithurate Lamp Post-Hard Cover

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अदनान कफ़ील ‘दरवेश’ की कविता को पढ़ते हुए लगता है जैसे हम अपने समय में फिर से दाख़िल हो रहे हैं। यह एक गतिमान समय है जिसमें आगे-पीछे आवाजाही करते हुए जितना आप अतीत में जाते हैं उतना ही वर्तमान में और भविष्य में भी। कवि ने समय की जो विभाजक रेखा बनाई है, वह स्वयं भी उस रेखा से पीछे जाकर ही वर्तमान के चेहरे के नाक-नक़्श उकेरता है। इस समय की ठीक-ठीक शक्ल पहचानने के लिए शायद समय में यह आवाजाही ज़रूरी है। बिना इसके इसे पहचानना सम्भव नहीं है।

वर्तमान, जिसकी विडम्बनाओं, विद्रूपताओं और नई तकनीकों के प्रतिदिन बदलते चेहरे को हम जानते हैं। उसकी बर्बरता और अमानवीयता को हम जानते हैं और समय की गति को अचानक बदल देने वाले परिवर्तनों को भी हमने बहुत क़रीब से देखा है। लेकिन अदनान की कविता को पढ़ने के बाद चीज़ें ज़्यादा साफ़ नज़र आने लगती हैं। जैसे हमारे ऐनक का नम्बर एकाएक बदल गया हो। शायद इस कविता की एक बड़ी ख़ूबी यह भी है कि वह प्रत्यक्षतः जानने और कविता को पढ़कर जानने के बीच के अन्तर का एहसास हमें कराती है। अदनान की कविता बहुत मुखर होकर स्वयं बहुत ऊँची आवाज़ में नहीं बोलती, जीवन की वास्तविकताएँ ही उसमें से बोलती हैं। इसलिए उसकी आवाज़ ज़्यादा विश्वसनीय लगती है। उसकी कविता में वाचिक कविता जैसा प्रवाह और उसकी प्रति-गति कविता के क़द को ऊँचा कर देती है। वह हमारी संवेदनाओं को झिंझोड़कर जागृत कर देती है और चीज़ों और स्थितियों के प्रति ज़्यादा वस्तुनिष्ठ बना देती है।

अदनान की कविता अपनी अस्मिता और परम्पराओं को बचाते हुए हमारे समय के सांस्कृतिक आघात के प्रति असहमति और प्रतिरोध की कविता है। वह हिन्दी कविता के अनुभवों के लैंडस्केप को अपने अनुभवों और मिथकों से पूरा करने की बहुत सजग कोशिश है।

–राजेश जोशी

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2022
Edition Year 2022, Ed. 1st
Pages 176
Price ₹495.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1.5
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Adnan Kafeel 'Darwesh'

Author: Adnan Kafeel 'Darwesh'

अदनान कफ़ील ‘दरवेश’

अदनान कफ़ील ‘दरवेश’ का जन्म ग्राम गड़वार, ज़िला बलिया, उत्तर प्रदेश में हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से हिन्दी साहित्य में एम.ए. किया। अब वहीं से पी-एच.डी. कर रहे हैं। हिन्दी की लगभग सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं तथा वेब ब्लॉग्स पर उनकी कविताएँ प्रमुखता से प्रकाशित एवं प्रशंसित हैं।

अदनान की कविताओं के अंग्रेज़ी, मराठी, कन्नड़, बांग्ला तथा उड़िया अनुवाद प्रकाशित हुए हैं।

वे ‘भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार’ (2018), ‘रविशंकर उपाध्याय स्मृति कविता पुरस्कार’ (2018), ‘वेणुगोपाल स्मृति कविता पुरस्कार’ (2019-2020) से सम्मानित हैं।

सम्पर्क : [email protected]

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