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Sarjnatmak Shiksha

Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Sarjnatmak Shiksha

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आज हर समझदार माता-पिता अपने बच्चे को सही शिक्षा दिलवाने के लिए बेचैन हैं, हर चैतन्य शिक्षक अपने विद्यार्थी को ऊँचाइयाँ देने के लिए आतुर है और हर प्रबुद्ध शिक्षा-प्रशासक अपने स्कूल-कॉलेज की शिक्षण-पद्धति को परवान चढ़ाकर उसे उत्कृष्ट बनाने के लिए संकल्पित है। किन्तु, कुछ अपवादों को छोड़कर, दुनिया भर की शिक्षा सर के बल खड़ी है। असल में, व्यवस्था-केन्द्रित शिक्षा-पद्धति को विद्यार्थी-केन्द्रित होना चाहिए। शिक्षा की मूल्य-दृष्टि, उसका पाठ्यक्रम शिक्षण-पद्धति और मूल्यांकन-पद्धति सबकुछ विद्यार्थी की वृत्ति, रुचि, योग्यता और गति के अनुरूप होनी चाहिए; विद्यार्थी की चेतना में गहरे छिपी उसकी मूल्यवान सर्जनात्मक क्षमता का, अधिकतम विकास कैसे किया जा सकता है, उसकी तजबीज ‘सर्जनात्मक शिक्षा’ में प्रस्तुत की गई है।

इसमें जीवन-दृष्टि और शिक्षा-दृष्टि के ठहराव को उजागर कर कल्याणकारी जीवन-दृष्टि और उसी के अनुरूप सर्जनात्मक पाठ्यक्रम, सर्जनात्मक शिक्षण-पद्धति, सर्जनात्मक मूल्यांकन पद्धति एवं रचनात्मक शिक्षा-प्रशासन-व्यवस्था को प्रस्तुत किया गया है।

पूर्व और पश्चिम के लगभग सौ शिक्षाशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों, मनोवैज्ञानिकों, धर्मशास्त्रियों, शिक्षा-वैज्ञानिकों आदि द्वारा लिखित शोधपूर्ण पुस्तकों का गहन मंथन करने के उपरांत जो शिक्षा-दृष्टि और शिक्षा-व्यवहार विकसित हुआ है; ‘सर्जनात्मक शिक्षा’ उसी का ऐसा ‘अमृत तत्त्व’ है जो उत्कृष्ट की तलाश में जुटे हुए प्रत्येक शिक्षाविद्, अभिभावक, शिक्षक, शिक्षा-प्रबन्धक और चैतन्य विद्यार्थी के लिए अनिवार्य रूप से पठनीय है। 

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 360p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 3
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Raghav Prakash

Author: Raghav Prakash

राघव प्रकाश

राघव प्रकाश ने राजस्थान विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी) किया। उन्होंने जयपुर, राजस्थान में ‘परिष्कार’ के नाम से पाँच कॉलेजों की स्थापना कर पाठ्यक्रम, शिक्षण और मूल्यांकन-पद्धति पर नवाचारी प्रयोग करते हुए ‘सर्जनात्मक शिक्षा’ का मौलिक स्वरूप विकसित किया। parishkar world उनका यू-ट्यूब चैनल  है। उन्होंने बीस पुस्तकों का लेखन किया है, जिनमें ‘शैलीविज्ञान और भारतीय एवं पाश्चात्य साहित्यशास्त्र’, ‘भारतीय एवं पाश्चात्य शैलीविज्ञान’, ‘आलोचना की नई तलाश’, ‘व्यावहारिक हिन्दी व्याकरण’, ‘साक्षात्कार आपका’ आदि प्रमुख हैं। वे राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी के निदेशक, ‘संधान’ एनजीओ के संयोजक रहे हैं और 29 वर्षों तक राजस्थान के राजकीय महाविद्यालयों में हिन्दी शिक्षण किया है।

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