Sansamaran Aur Shradhanjaliyan

Memoirs,Dinkar Granthmala
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Sansamaran Aur Shradhanjaliyan
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संस्मरण और श्रद्धांजलियाँ' रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के संस्मरणात्मक निबन्धों का संकलन है। यह संग्रहणीय इसलिए है कि इन संस्मरणों और श्रद्धांजलियों में देश के प्रख्यात विद्वानों, साहित्यकारों और राजनेताओं के अन्तरंग जीवन की भी झाँकियाँ हैं। उनके व्यक्तित्व के अनेक अनजाने रूप, देश की राजनीति को प्रभावित करनेवाले प्रसंग और वे मानवीय गुण भी उद्घाटित हुए हैं, जिन्होंने इन विभूतियों को सबका श्रद्धास्पद बना दिया।

डॉ. काशीप्रसाद जायसवाल, महापंडित राहुल सांकृत्यायन, राजर्षि टंडन, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, पं. माखनलाल चतुर्वेदी, महाप्राण निराला, पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीन', महादेवी जी, पं. बनारसीदास चतुर्वेदी, पं. किशोरीदास वाजपेयी, आचार्य शिवपूजन सहाय, आचार्य रघुवीर के अतिरिक्त कवि दिनकर के और भी अनेक समकालीन साहित्यकार, जिनके संस्मरण रोमांचित ही नहीं करते, मानवीय मूल्यों के प्रति आस्था भी जगाते हैं।

इस संग्रह में समाविष्ट हैं डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन्, डॉ. जाकिर हुसैन, श्री लालबहादुर शास्त्री, श्रीकृष्ण सिन्हा जैसे राजनेताओं के प्रति राष्ट्रकवि दिनकर की विनम्र श्रद्धांजलि और प्रेरक संस्मरण।

उल्लेखनीय है कि ये संस्मरण, ये श्रद्धांजलियाँ औपचारिकता नहीं, अपनत्व से भरी हैं। इन्हें पढ़ना देश के अतीत में जाना है। एक ऐसा अतीत जो वर्तमान ही नहीं, भविष्य के लिए भी प्रेरणा का स्रोत सिद्ध होगा।

More Information
Language Hindi
Format Hard Back
Publication Year 2019
Edition Year 2019, 1st Ed.
Pages 192p
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 2
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Editorial Review

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Ramdhari Singh Dinkar

Author: Ramdhari Singh Dinkar

रामधारी सिंह ‘दिनकर’

जन्म : 23 सितम्बर, 1908 को बिहार के मुंगेर जिले के सिमरिया नामक गाँव में हुआ था। शिक्षा मोकामा घाट तथा फिर पटना में हुई, जहाँ से उन्होंने इतिहास विषय लेकर बी.ए. (ऑनर्स) की परीक्षा उत्तीर्ण की। एक विद्यालय के प्रधानाचार्य, सब-रजिस्ट्रार, जन-सम्पर्क के उप निदेशक, भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति, भारत सरकार के हिन्दी सलाहकार आदि विभिन्न पदों पर रहकर उन्होंने अपनी प्रशासनिक योग्यता का परिचय दिया। 1924 में पाक्षिक ‘छात्र सहोदर’ (जबलपुर) में प्रकाशित कविता से साहित्यिक जीवन का आरम्भ।

प्रमुख कृतियाँ : कविता–रेणुका, हुंकार, रसवन्ती, कुरुक्षेत्र, सामधेनी, बापू, धूप और धुआँ, रश्मिरथी, नील कुसुम, उर्वशी, परशुराम की प्रतीक्षा, कोयला और कवित्व, हारे को हरिनाम आदि। गद्य–मिट्टी की ओर, अर्धनारीश्वर, संस्कृति के चार अध्याय, काव्य की भूमिका, पन्त, प्रसाद और मैथिलीशरण, शुद्ध कविता  की  खोज, संस्मरण  और श्रद्धांजलियाँ आदि।

सम्मान : 1959 में संस्कृति के चार अध्याय के
लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार। 1962 में भागलपुर विश्वविद्यालय की तरफ से डॉक्टर ऑफ लिटरेचर  
की मानद उपाधि। 1973 में उर्वशी के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार। भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्‍मानित।
निधन : 24 अप्रैल, 1974

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