RSS : Kaya Aur Maya
‘आर.एस.एस. : काया और माया’ देवनूर महादेव की दशकों के अध्ययन और अनुभव का निचोड़ है। उन्होंने हिन्दुत्व के सबसे प्रभावशाली विचारकों की पुस्तकों को सावधानीपूर्वक पढ़ा है और कर्नाटक में संघ- परिवार की गतिविधियों को अपनी आँखों देखा है।
—रामचंद्र गुहा
यह किताब हमारी ज़िन्दगियों पर आर.एस.एस. के कसते शिकंजे की कड़वी दास्तान है। यह एक फ़रियाद और एक चेतावनी है। यह अपनी शक्ति–अपनी सचाई–देवनूर महादेव के नज़रिये की स्पष्टता से, और उनकी सीधी-सादी सरल भाषा की पारदर्शिता से हासिल करती है, जैसे, ‘कट्टरता कहीं भी हो, वह मानवता को निगल जाती है’।
हमें उनकी सलाह पर ग़ौर करते हुए पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए। कम-से-कम फ़िलहाल। ऐसा न हो कि उनकी बात वीराने की चीख़ होकर रह जाए।
—गीतांजलि श्री
नफरत की राजनीति की जड़ पर वार करने वाला अहम प्रयास।
—चन्दन गौड़ा
देवनूर महादेव ने रचनात्मक राजनीतिक लेखन को सत्य की खोज के मार्ग के रूप में अपनाया है। वे घृणा की राजनीति का मुकाबला करने के लिए... लोगों से उनकी भाषा, उनके रूपकों और उनकी सांस्कृतिक स्मृतियों के जरिये बात करते हैं।
—योगेन्द्र यादव
देवनूर महादेव हमारे देश के प्रमुख समकालीन जन-बौद्धिक और चिन्तक हैं।
—विवेक शानबाग













