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Premchand (Radha)

Author: Satyendra
Edition: 2025, Ed. 3rd
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
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Premchand (Radha)

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उपन्यास सम्राट कहे जानेवाले प्रेमचन्द हमारी भाषा के कालजयी रचनाकार हैं और इनकी रचनाओं को क्लासिक का दर्जा प्राप्त है।

जीवन में जनवादी, साहित्य में यथार्थवादी प्रेमचन्द ने जीवन को जैसा देखा वैसा ही उसे चित्रित किया। उन्होंने उपन्यासों के अतिरिक्त कहानियाँ, नाटक और लेख भी लिखे। उनकी रचनाओं में एक व्यावहारिक ढंग का समाजवाद हमें दिखाई पड़ता है। भारतीय पुनर्जागरण के महान लेखकों में वे ही ऐसे हैं, जो अपने सामाजिक निष्कर्षों में क्रान्तिकारी या वैज्ञानिक समाजवाद के सबसे समीप हैं। यह पुस्तक एक विशेष दृष्टि से तैयार की गई है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रेमचन्द की रचनाओं से सम्बन्धित गम्भीर, विचारोत्तेजक व अमूल्य सामग्रियों को इस उम्मीद के साथ एक जगह सुलभ कराया गया है कि पाठकों, अध्यापकों व शोधार्थियों को प्रेमचन्द के अध्ययन में विशेष सहायता मिलेगी।

इसमें प्रेमचन्द के नारी-विषयक विचार, उनके पात्रों के चारित्रिक विकास, औपन्यासिक-कला के शिल्प-विधान, भाषा-शैली सम्बन्धी प्रयोगों के अध्ययन के अतिरिक्त प्रेमचन्द और तारा शंकर, प्रेमचन्द का नाट्य व कथा साहित्य तथा समस्यामूलक उपन्यास और प्रेमचन्द जैसे विषयों पर भी गम्भीरतापूर्वक विचार किया गया है।

आशा है कि प्रेमचन्द अध्येताओं के लिए यह पुस्तक उपयोगी व विचारोत्तेजक सिद्ध होगी।

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 1976
Edition Year 2025, Ed. 3rd
Pages 166p
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 22.5 X 14.5 X 1.5
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Author: Satyendra

सत्येन्द्र

सत्येन्द्र राजस्थान विश्वविद्यालय के आचार्य एवं अध्यक्ष थे। राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी के निदेशक भी रहे। लोक साहित्य की सैद्धान्तिकी पर उनका महत्त्वपूर्ण कार्य है। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं—‘लोक साहित्य विज्ञान’,  ‘कला, कल्पना और साहित्य’, ‘आशा निराशा’,  ‘प्रेमचन्द : कहानी कला’ और ‘प्रेमचन्द’।

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