Facebook Pixel

Pratinidhi kahaniyan : Marathi

Author: Madhav Sontake
Edition: 2025, Ed. 2nd
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
10% Off
Out of stock
SKU
Pratinidhi kahaniyan : Marathi

ग्रामीण, दलित तथा स्त्राी कहानियों के साथ-साथ साठोत्तरी कहानी साहित्य में व्यक्तिवादी चेतना की प्रयोगशील कहानियाँ भी लिखी जाती रही हैं। विलास, सारंग, श्याम मनोहर, एस.डी. इनामदार, दिलिप चित्रो, अनिरुद्ध बनहट्टी इस धारा के प्रमुख कथाकार रहे हैं। ये अतियथार्थवादी तथा अभिव्यंजनावादी विचारधारा की कहानियाँ हैं।
कुल मिलाकर मराठी कहानी की जो अति मनोरंजकता से विकास-यात्राा शुरू हुई थी, वह विभिन्न मोड़ों से ग्रामीण, दलित तथा स्त्राी-जीवन के अन्तरंग तक पहुँच गई है। आज वैश्वीकरण-बाजारीकरण की नवपूँजीवादी-उपभोक्तावादी सभ्यता में वह अपनी ‘मनुष्यता’ की रक्षा के लिए भी सन्नद्ध हो रही है।
—भूमिका से

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2009
Edition Year 2025, Ed. 2nd
Pages 140p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 18 X 12 X 1
Write Your Own Review
You're reviewing:Pratinidhi kahaniyan : Marathi
Your Rating
Madhav Sontake

Author: Madhav Sontake

माधव सोनटक्के

महाराष्ट्र, आंध्र तथा कर्नाटक के सीमावर्ती नांदेड़ जिले के लादगा नामक देहात में कृषक परिवार में जन्मे डॉ. माधव सोनटक्के एक योग्य अध्यापक, अनुसंधानकर्ता, व्यंग्यकार, आलोचक, अनुवादक तथा सम्पादक के रूप में जाने जाते हैं. नाटक, रंगमंच, प्रयोजन मूलक भाषा अध्ययन तथा तुलनात्मक साहित्य उनके प्रिय विषय रहे हैं.

सम्मान-पुरस्कार: ‘प्रयोजन मूलक हिंदी’ ग्रन्थ के लिए महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी का ‘पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार’, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी का ‘गजानन माधव मुक्तिबोध पुरस्कार’, अखिल भरतीय लिपि परिषद, राष्ट्रीय साहित्य परिषद्, अखिल भारतीय दलित साहित्य अकादमी आदि की ओर से सम्मान-पुरस्कार.

प्रकाशित ग्रन्थ: शकून (मराठी कविता), आधुनिक हिंदी-मराठी नाटक, समकालीन परिवेश और प्रासंगिक रचना संदर्भ, समकालीन नाट्य-विवेचन, नाट्यालोचन, हिंदी साहित्य का इतिहास, साहित्यशास्त्र, हिंदी भाषा तथा साहित्यशास्त्र, प्रयोजन मूलक हिंदी (पुरस्कृत), प्रयोजन मूलक हिंदी : प्रयुक्ति और प्रयोग, व्यावहारिक हिंदी, हिंदी के प्रयोजमूलक भाषा- रूप, हिंदी के अद्यतन अनुप्रयोग, दलित रंगमंच, प्रतिनिधि कहानियां मराठी (अनुवाद), वैश्वीकरण के परिप्रेक्ष्य में हिंदी भाषा तथा साहित्य, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भाषा तथा साहित्य का अध्ययन-अध्यापन, आलोचना का बदलता परिप्रेक्ष्य, प्रगतिशील साहित्य और नागार्जुन, हिंदी-मराठी का अनूदित साहित्य आदि सम्पादित ग्रन्थ तथा साहित्य-सागर, काव्य-सागर, गद्य-सागर, कथा-संसार, कथा यात्रा, प्रतिनिधि महिला एकांकी आदि पाठ्य पुस्तकों का संपादन. 

पता : डॉ. माधव सोनटक्के, पूर्व प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, डॉ. बाबा साहब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद

ईमेल : [email protected]

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top