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Ped Paun Soon Halai

Author: Prabhat
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Ped Paun Soon Halai

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प्रभात हिन्दी के विश‌िष्ट कव‌ि हैं। लोक उनकी कव‌िताओं में शब्दों से ज़्यादा साँस की तरह आता है, जिया हुआ, जीवन देता हुआ। उनका सम्बन्ध राजस्थान के माड़ अंचल से है जहाँ गीतों की एक लम्बी मौखिक परम्परा है—गीत जोड़ने यानी रचने की भी और सैकड़ों के समूह में उन्हें गाने की भी।

‘पेड़ पौनू सूँ हालै’ इसी परम्परा में लिखे गये उनके गीतों का संकलन है जिन्हें वे पिछले तीस साल से लिखते-सँजोते रहे हैं। गीतों का राग, धुन, विन्यास सब माड़ भाषा का है, हाँ रचना की प्रक्रिया में कुछ नई धुनें और नए विषय इनमें जरूर आ जुड़े हैं जिसका श्रेय कव‌ि की रचनात्मकता और प्रगत‌िशील मूल्यबोध को जाता है। किताब में जितने गीत हैं उतने ही चित्र भी हैं जिन्हें मह‌िलाएँ कच्चे घरों की दीवारों और आँगनों में बनाती हैं।

माड़ के लोक-मन और जीवन को उकेरते गीतों और क​​विताओं का संग्रह।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 124p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 16.5 X 1
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Prabhat

Author: Prabhat

प्रभात

जन्म : 1972, राजस्थान में करौली ज़‍िले के रायसना गाँव में।

प्रकाशन : ‘अपनों में नहीं रह पाने का गीत’ (कविता-संग्रह) ‘साहित्य अकादेमी’, नई दिल्ली से प्रकाशित। बच्चों के लिए गीत, कविता, कहानियों की पच्चीस किताबें प्रकाशित।

बज्जिका, छत्तीसगढ़ी, बैगा, अवधी, कुडुख, धावड़ी, भीली, बघेली इत्यादि लोक-भाषाओं में बच्चों के लिए लगभग चालीस किताबों का सम्पादन-पुनर्लेखन।

कहानीकार डॉ. सत्यनारायण के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित मोनोग्राफ़ ‘राजस्थान साहित्य अकादेमी’ से प्रकाशित।

सम्मान : ‘युवा कविता समय सम्मान’ (2012), ‘सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार’ (2010), ‘बिग लिटिल बुक अवार्ड’ (2019) से सम्मानित।

सम्प्रति : शिक्षा के क्षेत्र में स्वतंत्र कार्य।

 

 

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