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Maxim Gorki Ki Lokpriya Kahaniyan-E-Book

Author: Maxim Gorki
Translator: Fanish Singh
Edition: 2024, Ed. 2nd
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
Special Price ₹149.25 Regular Price ₹199.00
25% Off
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9788183612128-ebook

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Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Fanish Singh
Editor Not Selected
Publication Year 2017
Edition Year 2024, Ed. 2nd
Pages 172p
Price ₹199.00
Publisher Radhakrishna Prakashan
Dimensions 21.4 X 14 X 1.3
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Maxim Gorki

Author: Maxim Gorki

मैक्सिम गोर्की

मैक्सिम गोर्की का जन्म 28 मार्च, 1868 को वोल्गा के तट पर बसे नीजी नवगिरोव के एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में हुआ। बाद में उनकी मृत्यु के पश्चात् इसी नगर का नाम ‘गोर्की’ रखा गया। उनका पैतृक नाम ‘मैक्सिमोविच’ एवं कुलनाम ‘पेशकोव’ था।

घातक बीमारियाँ, क्रूर व्यक्ति, दुर्भाग्य और दुर्घटनाएँ उनके जीवन के अभिन्न अंग बन गए थे। गोर्की के जीवन के कटु अनुभवों को सुनकर लियो टॉल्स्टॉय ने उनसे कहा था : ‘तुम अजब आदमी हो। मुझे ग़लत न समझ बैठना लेकिन हो बड़े अजब आदमी। आश्चर्य है कि तुम अब भी इतने भले हो, जबकि तुम्हें बुरा बनने का पूरा अवसर था। सचमुच तुम्हारा हृदय बड़ा विशाल है।’

गोर्की की सबसे बड़ी उपलब्धि यह थी कि उन्होंने अपने युग की विसंगतियों और विरोधी शक्तियों के स्वरूप को बहुत जल्दी ही समझ लिया। इस तरह उन्होंने रूसी साहित्य में उभरते हुए निराशावाद और दासवाद के स्वरों का ज़ोरदार विरोध किया और लेखकों-साहित्यकारों को उनके सामाजिक कर्तव्य की चेतना कराई। अपने कृतित्व द्वारा उन्होंने एक नया आदर्श प्रस्तुत किया और रूसी साहित्य को ही नहीं, विश्व साहित्य को भी एक नई दिशा दी।

निधन : 18 जून, 1936; मॉस्को, (सोवियत संघ)।

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