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Manjushima-Paper Back

ISBN: 9789348229601
Edition: 2025, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
Special Price ₹262.50 Regular Price ₹350.00
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9789348229601
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‘मंजुशिमा’ शिवप्रसाद सिंह के उपन्यासों में अपनी अलग जगह रखता है। शिल्प के लिहाज से देखें तो यह रचना जीवनी, आत्मकथा, डायरी और संस्मरण आदि विधाओं को मिलाते हुए अपना औपन्यासिक वितान रचती है।

कथा के केन्द्र में लेखक की पुत्री है, जो अचानक ही बीमार पड़ जाती है। जाँच-पड़ताल के बाद पता चलता है कि उसकी दोनों किडनियाँ खराब हो चुकी हैं। यहीं से शुरू होता है पिता का संघर्ष। धीरे-धीरे यह संघर्ष सिर्फ अपनी बेटी को बचाने का संघर्ष नहीं रहता, बल्कि मृत्यु के विरुद्ध जीवन का, नियति के विरुद्ध मानवीय जिजीविषा का युद्ध हो जाता है। बेटी के जीवन के लिए किसी भी हद तक जाकर इस उपन्यास का पिता समाज के सामने यह भी स्पष्ट कर देता है कि बाकी लोगों की सोच के विपरीत उसके लिए बेटी का जीवन उतना ही महत्त्व रखता है, जितना बेटे का। लेकिन हर सम्भव कोशिशों के बावजूद पिता अपनी बेटी को ज्यादा दिन तक बचा नहीं पाता। यह पीड़ा इस उपन्यास की पंक्ति-पंक्ति में बिंधी है।

वेदना से ज्यादा विश्वसनीय किसी का साथ नहीं होता, इस गाम्भीर्य के साथ कदम-कदम आगे बढ़ती यह कथा पाठक को भी एक असीम पीड़ा में छोड़ जाती है। 

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2025
Edition Year 2025, Ed. 1st
Pages 208P
Price ₹350.00
Publisher Lokbharti Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 1
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Shivprasad Singh

Author: Shivprasad Singh

शिवप्रसाद सिंह

 

19 अगस्त, 1928 को जलालपुर, जमानिया बनारस में पैदा हुए शिवप्रसाद सिंह ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से 1953 में हिन्दी में एम.ए. किया। 1957 में पीएच.डी. करने के बाद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में ही प्राध्यापक नियुक्त हुए।

शिवप्रसाद सिंह प्रख्यात शिक्षाविद् तो थे ही, साहित्य के भी शिखर पुरुष रहे हैं। ‘नयी कहानी’ आन्दोलन के स्तम्‍भ शिवप्रसाद जी प्राचीन और समकालीन साहित्य से गहरे संपर्क में रहे हैं। कुछ समालोचक उनकी कथा-रचना ‘दादी माँ’ को पहली ‘नयी कहानी’ मानते हैं।

प्रकाशित कृतियाँ : उपन्यास—‘अलग-अलग वैतरणी’, ‘नीला चाँद’, ‘मंजुशिमा’, ‘शैलूष’; कहानी-संग्रह—‘अंधकूप’ (सम्पूर्ण कहानियाँ, भाग-1), ‘एक यात्रा सतह के नीचे’ (सम्पूर्ण कहानियाँ, भाग-2); आलोचना—‘कीर्तिलता और अवहट्ठ भाषा’, ‘आधुनिक परिवेश और नवलेखन’, ‘आधुनिक परिवेश और अस्तित्ववाद’; निबन्ध-संग्रह—‘मानसी गंगा’, ‘किस-किसको नमन करूँ’, ‘क्या कहूँ कुछ कहा न जाए’; जीवनी—‘उत्तरयोगी’ (महर्षि अरविन्द)।

निधन : 28 सितम्बर, 1998

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