Facebook Pixel

Kuchh Din Aur-Hard Cover

Special Price ₹297.50 Regular Price ₹350.00
15% Off
In stock
SKU
9788171789283
- +
Share:
Codicon

‘कुछ दिन और’ निराशा के नहीं, आशा के भँवर में डूबते चले जाने की कहानी हैं—एक अन्धी आशा, जिसके पास न कोई तर्क है, न कोई तंत्र; बस, वह है अपने-आप में स्वायत्त

कहानी का नायक अपनी निष्क्रियता में जड़ हुआ, उसी की उँगली थामे चलता रहता है धीरे-धीरे ज़िन्दगी के ऊपर से उसकी पकड़ छीजती चली जाती है और, इस पूरी प्रक्रिया को झेलती है उसकी पत्नी—कभी अपने मन पर और कभी अपने शरीर पर वह एक स्थगित जीवन जीनेवाले व्यक्ति की पत्नी है इस तथ्य को धीरे-धीरे एक ठोस आकार देती हुई वह एक दिन पाती है कि इस लगातार विलम्बित आशा से कहीं ज़्यादा श्रेयस्कर एक ठोस निराशा है जहाँ से कम-से-कम कोई नई शुरुआत तो की जा सकती है और, वह यही निर्णय करती है

‘कुछ दिन और’ अत्यन्त सामान्य परिवेश में तलाश की गई एक विशिष्ट कहानी है, जिसे पढ़कर हम एकबारगी चौंक उठते हैं और देखते हैं कि हमारे आसपास बसे इन इतने शान्त और सामान्य घरों में भी तो कोई कहानी नहीं पल रही

More Information
Language Hindi
Binding Hard Back, Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 1976
Edition Year 2015, Ed. 3rd
Pages 152p
Price ₹350.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 15 X 1.4
Write Your Own Review
You're reviewing:Kuchh Din Aur-Hard Cover
Your Rating
Manzoor Ehtesham

Author: Manzoor Ehtesham

मंज़ूर एहतेशाम

मंज़ूर एहतेशाम का जन्म 3 अप्रैल, 1948 को भोपाल में हुआ था।

उन्होंने स्नातक तक शिक्षा हासिल की। इंजीनियरिंग की अधूरी शिक्षा के बाद दवाएँ बेचीं। फिर वर्षों तक फ़र्नीचर और इंटीरियर डेकोर का व्यवसाय किया। निराला सृजनपीठ, भोपाल के अध्यक्ष रहे।

उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं—‘कुछ दिन और’, ‘सूखा बरगद’, ‘दास्तान-ए-लापता’, ‘पहर ढलते’, ‘बशारत मंज़िल’ (उपन्यास); ‘तसबीह’, ‘तमाशा तथा अन्य कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘एक था बादशाह’ (नाटक–सत्येन कुमार सह-लेखन)।

उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हुए जिनमें प्रमुख हैं—‘सूखा बरगद’ के लिए ‘श्रीकान्त वर्मा स्मृति सम्मान’ और भारतीय भाषा परिषद, कलकत्ता का पुरस्कार; ‘दास्तान-ए-लापता’ के लिए ‘वीरसिंह जूदेव पुरस्कार’; ‘तसबीह’ के लिए ‘वागीश्वरी पुरस्कार’; समग्र लेखन पर ‘पहल सम्मान’, ‘राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान’। 2003 में उन्हें ‘पद्मश्री’ से अलंकृत किया गया।

26 अप्रैल, 2021 को उनका निधन हुआ। 

Read More
Books by this Author
New Releases
Back to Top