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Koi Ek Syeda

Author: Neha Dixit
Translator: Prabhat Singh
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Koi Ek Syeda

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‘कोई एक सईदा’ किताब में नेहा दीक्षित ने एक साधारण और बेनाम भारतीय मह‌िला की कहानी असाधारण ढंग से लिखी है। बाबरी मस्ज‌िद ध्वंस के चलते हुए दंगों के बाद सईदा अपने छोटे बच्चों और पति के साथ बनारस को छोड़कर दिल्ली आ जाती है। एक ग़रीब विस्थापित मज़दूर के रूप में वह दिल्ली में अनेक कामों को आज़माती है—जींस के धागों की तुरपाई से लेकर नमकीन बनाने तक, बादामों से गिरी निकालने से लेकर चाय की छलनी बनाने तक—पचास से ज़्यादा काम, ताकि उसकी घरेलू ज़रूरतें पूरी होती रहें। ऐसे काम जिनमें एक दिन की छुट्टी लेने का मतलब है काम से हाथ धो बैठना।

एक दशक के शोध और लगभग नौ सौ लोगों से साक्षात्कारों के बाद तैयार हुई इस किताब में हमें अनेक तरह के लोग मिलते हैं—चाँदनी चौक का एक रिक्शेवाला जिसकी ज़िन्दगी एक आतंकी हमले की भेंट चढ़ जाती है, एक डॉक्टर जिसे ‌लिंग निर्धारण टेस्ट के लिए गिरफ़्तार किया जाता है, एक गोरक्षक जिसकी बहन सईदा के बेटे के साथ भाग जाती है और पुलिसवाले जिन्हें मुस्ल‌िम‌‌ युवकों को पीटने में बहुत ज़्यादा मज़ा आता है।

दिल्ली में हुए 2020 के दंगों के साथ सईदा की ज़िन्दगी का जैसे एक चक्र पूरा हो जाता है। उसे फिर उखड़ना पड़ता है। लेकिन वह अब इसकी अभ्यस्त हो गई है। उसे पता है कि एक ग़रीब, एक मुस्ल‌िम और एक औरत होने के नाते उसे क्या झेलना है।

गहन अन्तर्दृष्ट‌ि से युक्त यह किताब उस कठोर, कड़वे यथार्थ की अक्कासी करती है जो भारत के अभ‌िजात तबक़े की आँखों से बहुत दूर रहता है। यह उन लाखों लोगों की कहानी है जिनकी कहानी कभी नहीं कही जाती। यह ‘नये भारत’ के शहरी जीवन का ऐसा चित्र है जो किसी भी संवेदनशील मन को चीरकर रख देता है।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Prabhat Singh
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 384p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 21.5 X 14 X 2.5
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Author: Neha Dixit

नेहा दीक्षित

नेहा दीक्षित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक हैं। उन्होंने 17 सालों तक राजनीति, जेंडर और सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों पर लेखन व पत्रकारिता की है। वह अल जज़ीरा, द वाशिंगटन पोस्ट, कारवां, द वायर और अन्य जाने-माने प्रकाशनों के लिए रिपोर्टिंग करती हैं। वे मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर काम करती रही हैं, और पुलिस द्वारा ग़ैर-न्यायिक हत्याओं, घृणाजन्य अपराधों, मानव तस्करी, बड़ी फ़ार्मा कम्पनियों द्वारा हाशिए पर पड़े लोगों पर क्लिनिकल ट्रायल और दक्षिण एशिया में साम्प्रदायिक हिंसा आदि के मामलों को उजागर करती रही हैं। उन्होंने राजनीतिक प्रोफ़ाइल भी लिखे हैं और बहुसंख्यकवादी सरकारों के तहत श्रम‌िकों से जुड़े अन्त‌‌िर्वरोधों पर काम किया है।

उन्हें एक दर्जन से ज़्यादा अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार मिले हैं, जिनमें कमेटी टु प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स द्वारा ‘अन्तर्राष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता पुरस्कार’, उत्कृष्ट महिला पत्रकार के लिए ‘चमेली देवी जैन पुरस्कार’, यूरोपीय आयोग से पत्रकारिता के लिए ‘लोरेंजो नताली पुरस्कार’ और अन्य कई पुरस्कार शामिल हैं।

‘द मेनी लाइव्ज़ ऑफ़ सईदा एक्स’ उनकी पहली किताब है। इस किताब को ‘द हिंदू’ और ‘डेक्कन हेराल्ड’ ने 2024 की महत्त्वपूर्ण किताब के रूप में चुना था। इसी किताब के लिए उन्हें ‘रामनाथ गोयनका साहित्य सम्मान’ और ‘कलिंगा सर्वश्रेष्ठ डेब्यू पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। ‘कोई एक सईदा’ उनकी इसी किताब का अनुवाद है।

ई-मेल : [email protected]

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