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Kamayani Aur Hindi Alochana-Hard Cover

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‘कामायनी’ हिन्दी की प्रौढ़ कृति है। इसमें मानवता का बचपन अभिव्यक्त हुआ है। बचपन हमें मोहित करता है। वह भविष्य की प्रेरणा का काम करता है। ‘कामायनी’ काव्याभिव्यक्ति के रूप में यह क्षमता रखती है। इसमें युग-चिन्ता है; आशा है; ‘काम-राग’ है; कर्म है; संघर्ष है; और साम्य-विचार की गूँज भी है। कलात्मक अभिव्यक्ति की दृष्टि से यह एक श्रेष्ठ काव्य है। इसने चार दशकों तक हिन्दी आलोचना को प्रभावित किया है। आधुनिक कविता पर विचार की दृष्टि से इसने सबसे अधिक स्थान घेर रखा है। हिन्दी की कोई एक कविता नहीं, जिसने इसके बराबर हलचल पैदा की हो। ‘राम की शक्ति-पूजा’ भी नहीं। ‘अँधेरे में’ भी नहीं। ‘असाध्य वीणा’ भी नहीं। और ‘कामायनी’ के बाद हिन्दी कविता ने जो नया किया है, उसमें ‘कामायनी’ का कितना योग है, यह भी अध्ययन का दिलचस्प विषय है।

‘कामायनी’ की व्याख्या की कई दृष्टियाँ हैं, कई रूप हैं। इस पुस्तक में ‘कामायनी’ सम्बन्धी प्रतिनिधि आलोचना का अध्ययन किया गया है। ‘कामायनी’ और उसकी आलोचना में दिलचस्पी रखनेवाले पाठक इस पुस्तक से लाभान्वित होंगे।

—भूमिका से

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Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Not Selected
Editor Not Selected
Publication Year 2023
Edition Year 2023, Ed. 1st
Pages 120p
Price ₹395.00
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 22 X 14.5 X 1.5
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Sudhir Ranjan Singh

Author: Sudhir Ranjan Singh

सुधीर रंजन सिंह 

जन्म : 28 अक्टूबर, 1960

कविता-संग्रह : ‘और कुछ नहीं तो’ और ‘मोक्षधरा’। 

काव्य-अनुरचना : ‘भर्तृहरि : कविता का पारस पत्थर’। 

आलोचना : ‘हिन्दी समुदाय और राष्ट्रवाद’, ‘कविता के प्रस्थान’ और ‘कविता की समझ’। 

वृत्तान्त : ‘भारिया : पातालकोट का जीवन-छन्द’।

सम्पादन : ‘अद्यतन हिन्दी आलोचना’ और आर.पी. नरोन्हा की पुस्तक ‘अ टेल टोल्ड बाई एन इडियट’ का हिन्दी अनुवाद ‘एक अनाड़ी की कही कहानी’।

ई-मेल : [email protected]

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