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Jeevan Sangit

Translator: Mrityunjay
Edition: 2026, Ed. 1st
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Jeevan Sangit

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‘जीवन संगीत’ विख्यात ख़याल गायिका विदुषी गंगूबाई हंगल की आत्मकथा है, जो मूलतः कन्नड़ भाषा में लिखी गई थी। पहले यह कन्नड़ से अंग्रेज़ी में अनूदित हुई और अब हिन्दी में आपके सामने है।

गंगूबाई हंगल निचली कही जाने वाली जाति में पैदा हुईं, वे उस देवदासी परम्परा से आती थीं जहाँ स्त्रियाँ ब्राह्मण पुरुष की ‘रक्षिता’ होती थीं। लेकिन जाति, जेंडर और परम्परा की कठिनाइयों को चीरती हुई, सामाजिक-आर्थिक मुश्किलों को पार करती हुई वे संगीत के प्रति समर्पण और साधना से भारतीय संगीत जगत के आकाश पर छा गईं। गले के ऑपरेशन के चलते उनकी आवाज़ में एक ‘मर्दाना भारीपन’ आ गया था, लेकिन इस सीमा को भी उन्होंने शक्ति में बदल दिया।

‘संगीत नाटक अकादेमी सम्मान’, ‘तानसेन सम्मान’, ‘पद्म भूषण’ एवं ‘पद्म विभूषण’ जैसे सम्मानों से नवाज़ी गईं गंगूबाई हंगल की यह आत्मकथा हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक दौर की गवाही तो देती ही है, साथ ही हमें लगन, मेहनत, जीवट, समर्पण और प्रतिभा की आभा से दमकती ऐसी इनसान से भी मिलवाती है, जिसने कभी हार नहीं मानी, जिसने समाज द्वारा दी गई पहचान का अतिक्रमण कर अपनी अस्मिता ख़ुद गढ़ी।

More Information
Language Hindi
Binding Paper Back
Translator Mrityunjay
Editor Not Selected
Publication Year 2026
Edition Year 2026, Ed. 1st
Pages 96p
Publisher Rajkamal Prakashan
Dimensions 20 X 13 X 1
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Author: Dr. Gangubai Hangal

गंगूबाई हंगल

पद्म भूषण और पद्म विभूषण सम्मान से नवाज़ी गईं

डॉ. गंगूबाई हंगल हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की अप्रतिम गायिका थीं। किराना घराने से सम्बद्ध पंडित बाल गन्धर्व की शागिर्द विदुषी गंगूबाई हंगल का गायन ताक़तवर आवाज़, सुरों की सटीकता, किराना घराने की शुद्धता और धीरे-धीरे विकसित होने वाले रागों के लिए जाना जाता है।

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